हमीरपुर। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी अब पढ़ाई के साथ खेती, तकनीक, भोजन और मानव सेवा से जुड़े व्यावहारिक कौशल भी सीखेंगे। कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थी बिना मिट्टी के पौधे उगाने, बिना आग के भोजन पकाने, मशीनों के इस्तेमाल, पारिवारिक स्वास्थ्य पुस्तिका तैयार करने और विज्ञापन बनाने जैसी गतिविधियां करेंगे।
इसके लिए प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों में कौशल बोध कार्यक्रम शुरू किया है। नई शिक्षा नीति-2020 के तहत शुरू किए गए इस कार्यक्रम के लिए प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने जिले के पुस्तक वितरण केंद्रों में पुस्तकें भेज दी हैं।
निदेशालय के निर्देशानुसार जल्द ही स्कूलों में इनका आवंटन किया जाएगा। पाठ्यक्रम के आधार पर विद्यार्थियों से अलग-अलग परियोजनाएं करवाई जाएंगी, ताकि वे विषयों को पढ़ने के साथ करके भी समझ सकें।
तीन वर्षों में प्रत्येक विद्यार्थी को कुल नौ कौशल आधारित परियोजनाएं पूरी करनी होंगी। हर शैक्षणिक सत्र में कम से कम तीन परियोजनाएं करवाई जाएंगी। इसके लिए सालाना करीब 90 घंटे और तीन वर्षों में कुल 270 घंटे का व्यावहारिक कार्य निर्धारित किया गया है।
कक्षा के हिसाब से होंगी गतिविधियां
छठी कक्षा में
स्कूल की रसोई वाटिका, जैव विविधता पंजिका, मशीनों और सामग्रियों के साथ काम करना, निर्माण कौशल, चल-चित्र एवं खेल, मानव सेवा क्षेत्र, स्कूल संग्रहालय और बिना आग के भोजन पकाने जैसी गतिविधियां करवाई जाएंगी।
सातवीं कक्षा में
पौधशाला, स्कूल में आवास वाटिका, मशीनों और सामग्रियों के साथ काम करना, रंगाई-बांधाई, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक, कठपुतलियों के माध्यम से कहानी सुनाना, पारिवारिक स्वास्थ्य पुस्तिका और कौशल मेले की योजना बनाना सिखाया जाएगा।
आठवीं कक्षा में
जल कृषि के माध्यम से बिना मिट्टी के पौधे उगाने, खेत में पशुओं को खिलाने और उनकी देखभाल करने, लकड़ी और बांस के साथ काम करने, घर की स्वचालित व्यवस्था, जल प्रबंधन के लिए जल लेखा-परीक्षण, विज्ञापन तैयार करने और कौशल मेले की योजना जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
कोट
प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के निर्देशानुसार स्कूलों में पुस्तकों का आवंटन किया जाएगा। इन पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ विभिन्न कौशल सीखने में सहायता मिलेगी।
-विनीत शर्मा, प्रभारी, जिला पुस्तक वितरण केंद्र, हमीरपुर