हिमाचल प्रदेश नेशनल हाईवे विभाग और ठेकेदार के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव के कारण आम जनता पिस रही है। इसका खामियाजा नेशनल हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। ठेकेदार का आरोप है कि एनएच विभाग न तो टारिंग का कार्य शुरू करने के लिए समयावधि बता रहा है और न ही बकाया पेमेंट का भुगतान कर रहा है। जबकि, नियमानुसार समयावधि बताना जरूरी होता है। तय समयावधि में कार्य पूरा होने और आवंटित कार्य के पूरा होने के बाद बिल प्रस्तुत करने पर ही ठेकेदार को भुगतान होता है। लेकिन, एनएच विभाग और ठेकेदार के आपसी टकराव से कार्य लटका हुआ है।
एनएच विभाग ने त्रिलोक चंद एंड कंपनी को वर्ष 2011 में नादौन उपमंडल के तहत भट्ठा से लेकर हमीरपुर के पक्का भरो तक एनएच के विस्तारीकरण, पुलियों, डंगों का निर्माण और टारिंग का कार्य आवंटित किया था। संबंधित कंपनी को करीब 13 करोड़ रुपये में यह कार्य आवंटित हुआ।
ठेकेदार ने विभाग के पास सवा करोड़ की बैंक गारंटी भी दी। कंपनी को यह कार्य जून 2015 में पूरा करना था। लेकिन, एनएच के किनारे अतिक्रमण और पेड़ों के कटान का मामला लटकने से कार्य में देरी हो गई। कंपनी को दो बार विभाग से एक्सटेंशन भी मिल चुकी है।
ठेकेदार सुधीर गुप्ता ने कहा कि 87 फीसदी कार्य पूरा कर दिया है। 13 करोड़ के टेेंडर के विरुद्ध कंपनी साढ़े ग्यारह करोड़ का कार्य पूरा कर चुकी है। लेकिन, कंपनी को विभाग से अभी तक साढ़े दस करोड़ का ही भुगतान हुआ है। इस बीच विभाग ने जुलाई 2016 में कंपनी का टेंडर रद्द कर दिया। इसके बाद कंपनी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी को कोर्ट से राहत मिल चुकी है, लेकिन अब विभाग फिर समयावधि पर अड़ गया है।
एनएच विभाग हमीरपुर के एक्सईएन एचएल शर्मा ने कहा कि अगर संबंधित कंपनी को कोर्ट से राहत मिली है तो उसे कार्य पूरा करना चाहिए। संबंधित कंपनी को दो बार पहले भी एक्सटेंशन दी जा चुकी है, लेकिन कार्य पूरा करने में आनाकानी करती रही है।