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Hamirpur (Himachal) News: बारिश में ढहा एनएच-03 का डंगा, चार घरों के लिए खतरा

Mon, 12 Aug 2024 07:17 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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निमार्णधीन मंडी हमीरपुर एनएच पर डंगा ढहने के बाद बचाव के लिए डाला गया तिरपाल। संवाद
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हमीरपुर/अवाहदेवी। निर्माणाधीन नेशनल हाईवे 03 हमीरपुर-मंडी पर कांगू दा गलू-ढली वाया कलाहू सड़क के पास लगाए गए डंगे के ढहने से चार घरों पर खतरा मंडराने लगा है। पिछले साल इस एनएच पर 150 मीटर लंबा डंगा लगाया गया था, जो पहली ही बारिश में धराशायी हो गया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय इस एनएच का निर्माण कार्य करवा रहा है।
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लाखों की लागत से निर्मित यह डंगा बीते वीरवार रात बारिश के दौरान गिर गया। इससे न केवल एचएच के निर्माण कार्य में जुटी कंपनी के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि चार परिवारों के लिए भी खतरे का कारण बन गया है। डंगे के ढहने से सबसे ज्यादा खतरा प्रकाश चंद, ओंकार सिंह, मेहर चंद गारला और दिनकर राणा के घरों के लिए पैदा हुआ है।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि डंगा लगाने के दौरान निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा निकासी नालियों की उचित व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे बारिश का पानी डंगे के साथ बहने लगा और बाद में डंगा ढह गया। उन्होंने कहा कि डंगे के ढहने से न केवल घरों को बल्कि लोक निर्माण विभाग के अधीन आने वाली कांगू दा गलू-ढली वाया कलाहू सड़क को भी नुकसान पहुंचा है।
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100 मीटर तक पीडब्ल्यूडी की सड़क को भी नुकसान

कांगू दा गलू-ढली वाया कलाहू सड़क लोक निर्माण विभाग मंडल भोरंज के अंतर्गत आती है। यह सड़क इस डंगे से ठीक ऊपर से गुजरती है। ऐसे में यहां पर कई घरों को खतरा पैदा हो गया है। करीब 100 मीटर तक सड़क धंस गई है। इस के बाद यहां से बड़े वाहनों के गुजरने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

प्रभावित परिवारों की मांग, पीसीसी तकनीक से हो निर्माण
प्रभावित परिवारों ने डंगे के निर्माण में लापरवाही पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मजबूत नींव बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह जरूरी है, ताकि उनके घरों को भविष्य में कोई नुकसान न हो। इसके अलावा क्रैश बैरियर भी लगाने की मांग की गई है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

जाली वाले डंगे का होगा निर्माण : सुशील
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के कनिष्ठ अभियंता सुशील ने कहा कि पहले यहां जाली वाला डंगा लगाने की योजना थी, लेकिन स्थानीय लोगों की मांग पर पीसीसी तकनीक से डंगा बनाया गया था। अब पीसीसी की नींव के साथ जाली वाला डंगा लगाया जाएगा, ताकि भविष्य में बरसात के दौरान डंगा सुरक्षित रहे।
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