राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की शिमला बेंच ने नादौन उपमंडल के एक स्टोन क्रशर और हॉट मिक्सिंग प्लांट को नियमों की अवहेलना पर तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं।
एनजीटी ने अपने फैसले में साफ कहा है कि यह क्रशर और हॉट मिक्सिंग प्लांट लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट के अनुसार खड्ड में वाटर बॉडी से 100 मीटर के दायरे के अंदर लगे पाए गए हैं।
इसके चलते इसे तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए जाते हैं। ग्रीन ट्रिब्यूनल की पीठ ने एडिशनल एडवोकेट जरनल को यह भी हिदायत दी है कि वह इस फैसले से जिला कलेक्टर हमीरपुर और संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाकर पालना करवाएं।
एसडीएम नादौन को भी तुरंत आदेश की पालना के आदेश दिए हैं। इससे पहले एनजीटी की शिमला पीठ ने 19, 20 दिसंबर 2016 को इस यूनिट को चलाने पर स्टे आर्डर देते समय इन आदेशों का पालन न करवाने वाले अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेवार बनाए जाने के आदेश दिए थे। छह जनवरी 2017 को दोबारा सुनवाई के बाद इस यूनिट को नियम विरोधी पाकर तुरंत प्रभाव से बंद करने का फैसला सुनाया है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता निशु ठाकुर और ईशा ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह यूनिट पिछले 21 साल से कानून की धज्जियां उड़ा कर चलाया जा रहा है। इस फैसले से आठ साल तक झूठ के साथ लड़ने के बाद न्याय मिला है।
उन्होंने कहा कि इस क्रशर को चलाते हुए इसके मालिकों ने करोड़ों रुपये का खनन कर बजरी-रेत बेचा और पर्यावरण और खड्ड में लगी जल योजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया।
इसकी पूर्ति के लिए सक्षम न्यायालयों में मामलों को उठाया जा रहा है। बीते समय में स्थानीय एसडीएम की अध्यक्षता में बनाई कमेटी ने यह रिपोर्ट पेश कर एनजीटी को गुमराह किया था कि यह क्रशर और हॉट मिक्सिंग प्लांट नियमों के अनुसार सही है।
इसे एनजीटी के समक्ष उठाया तो एनजीटी ने लोकल कमिश्नर लगा कर मांगी रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि एसडीएम की चेयरमैनशिप में भेजी रिपोर्ट बिल्कुल निराधार थी। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी आज तक गलत रिपोर्ट देकर क्रशर मालिकों के साथ मिलीभगत कर उन्हें अनुचित लाभ दिलवाने में संलग्न रहे। उनके विरुद्ध सक्षम न्यायालयों से कार्रवाई कर उन्हें दंडित करने की याचिकाएं डाली जा रही हैं।