संवाद न्यूज एजेंसी
लदरौर(हमीरपुर)। उपमंडल भोरंज के पट्टा बाजार में सार्वजनिक शौचालय की सुविधा न होने से दुकानदारों, स्थानीय लोगों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में 200 से अधिक दुकानें हैं और बस स्टाॅप भी मौजूद है।
ऐसे में आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और अन्य काम के लिए पहुंचते हैं। सार्वजनिक शौचालय न होने से खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अधिक दिक्कत होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पट्टा बाजार में लंबे समय से सार्वजनिक शौचालय की जरूरत महसूस की जा रही है। बाजार में दुकानों की संख्या बढ़ने के साथ दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है।
बस स्टाॅप होने के कारण विभिन्न रूटों के यात्री भी यहां बसों का इंतजार करते हैं। बस आने में देरी होने पर शौचालय की जरूरत पड़ने पर यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
बाजार में खरीदारी और बैंक सहित अन्य जरूरी काम से आने वाली महिलाओं को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि शौचालय की सुविधा न होने के कारण कई बार उन्हें परेशानी के चलते जल्दी लौटना पड़ता है।
दुकानदारों और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोगों को भी दिनभर इस समस्या से जूझना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बाजार में जल्द सार्वजनिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है।
कोट्स
बाजार में शौचालय के निर्माण को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि यात्रियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। बाजार में भूमि उपलब्ध होने पर शौचालयों का निर्माण करवाया जाएगा।
-शशिपाल शर्मा, एसडीएम भोरंज
बाजार में रोजाना काफी संख्या में लोग आते हैं। शौचालय की सुविधा नहीं होने से दुकानदारों के साथ ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
-केदारनाथ, ग्राहक।
बाजार में खरीदारी के लिए आने वाली महिलाओं के लिए शौचालय की सुविधा बेहद जरूरी है। प्रशासन को इस समस्या का जल्द समाधान करना चाहिए। -गंभरी देवी, स्थानीय निवासी
पट्टा बाजार में बस स्टॉप होने के कारण यहां बसों का इंतजार करने वाले यात्री काफी समय रुकते हैं। सार्वजनिक शौचालय होने से लोगों को राहत मिलेगी। -रमना देवी, यात्री
बाजार में 200 से अधिक दुकानें हैं। आबादी और आवाजाही को देखते हुए यहां सार्वजनिक शौचालय होना जरूरी है। प्रशासन को इसके लिए जल्द कदम उठाना चाहिए। -कृष्ण देव, स्थानीय निवासी
-केदारनाथ,ग्राहक।
-केदारनाथ,ग्राहक।
-केदारनाथ,ग्राहक।
-केदारनाथ,ग्राहक।