संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। स्लॉटर हाउस न होने के कारण मांस की जांच के लिए नगर निगम हमीरपुर की कवायद फाइलों में ही दफन होकर रह गई है। इससे लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।
नगर निगम के तहत कई वर्ष पुराना स्लॉटर हाउस जर्जर हालत में पहुंच गया है। स्लॉटर हाउस की मरम्मत न होने के कारण इसका प्रयोग बंद कर दिया गया है। इसके कारण मांस विक्रेता की पौ बारह हो रखी है।
नियमों के अनुसार मांस को बेचने से पहले पशुपालन विभाग के चिकित्सक मांस की जांच करते हैं। इसमें विशेष ध्यान रखा जाता है कि मांस खराब न हो। अगर मांस खाने योग्य नहीं है, तो उसे बेचा नहीं जा सकता है। इसके अलावा गर्भवती बकरी का मांस भी बेचा नहीं जा सकता है, लेकिन जांच न होने के कारण यह तय नहीं किया जा सकता है कि बेचा जा रहा मांस खाने योग्य है या नहीं।
हमीरपुर शहर में प्रतिदिन 50 से अधिक बकरे काटे जाते हैं। मांस की जांच करवाने के लिए एक निर्धारित फीस भी वसूली जाती है। इसके अलावा पशुओं को केवल स्लॉटर हाउस में ही काटा जाता है तथा उसके अवशेषों को तय नियमों के अनुसार ही नष्ट किया जाता है, लेकिन स्लॉटर हाउस न होने के कारण सब नियम तार-तार होकर रह गए हैं।
शहर में विभिन्न स्थानों पर मांस विक्रेता हैं। इनमें बस स्टैंड और भोटा चौक आदि शामिल हैं। हालांकि नगर निगम हमीरपुर के अधिकारी भी इस समस्या से भली-भांति अवगत हैं, लेकिन कदम उठाने के लिए कोई नीति नहीं बन पाई है। हालांकि अधिकारी शीघ्र ही स्लॉटर हाउस की मरम्मत कर उसे शुरू करने के दावे कर रहे हैं। ऐसे में देखना यह है कि यह दावे कब तक धरातल पर उतरते हैं।