दोपहर बाद चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हीरा लाल के कार्यालय पहुंचे और उनका घेराव किया। घटना के लिए जिम्मेदार डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी। एमएस ने दो दिन पहले दिए एक बयान पर प्रदर्शन करने वाले लोगों से लिखित में माफी मांगी। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ठाकुर का भी घेराव किया। उनसे लापरवाह डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर रोष जताया। धरने-प्रदर्शन को जिला परिषद सदस्य विभा सिंह, निशा ठाकुर, पूर्व जिला परिषद सदस्य हितेश्वर सिंह ने भी समर्थन दिया और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने शाम करीब चार बजे ढालपुर चौक पर चक्का जाम कर दिया। इस कारण कुल्लू की सड़कों पर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं। मुख्य चौक ढालपुर में प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए। इससे मुख्य मार्ग के साथ-साथ क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की ओर जाने वाला मार्ग और सर्कुलर मार्ग में जाम लग गया। इससे वाहनों में सवार यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। कुछ समय बाद सर्कुलर सड़क से छोटे वाहनों की आवाजाही सुचारु करने की कोशिश की लेकिन मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति विकराल हो गई। ज्यादातर बसों और छोटे वाहनों में लंबा सफर करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्रीय अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर असंतुष्ट होकर ढालपुर चौक का रुख किया और यहां धरना दिया। प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए पहुंचे नायब तहसीलदार कुल्लू पर नशे में आने का आरोप लगाया है। उनकी मेडिकल जांच करने की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बलदेव ठाकुर उर्फ बंटी सराजी ने आरोप लगाया है कि सराज क्षेत्र की महिला 20 जून को क्षेत्रीय अस्पताल में रूटीन चेकअप के लिए आई थी। डॉक्टर ने उसका सिजेरियन कर दिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने रेफर करने का आग्रह किया तो डॉक्टरों ने उसे ठीक बताया लेकिन कुछ देर बाद महिला की मौत हो गई। हैरानी जताई कि इस घटना को नौ दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मृतक महिला की ननद सपना ने बताया कि वह भाभी के साथ अस्पताल आई थीं। इससे पहले नौ बार उसका चेकअप हो चुका था। 20 जून को भी रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर अनु ने सिजेरियन के लिए तैयार होने को कहा और सिजेरियन किया। उसके बाद करीब 24 घंटे तक वह ठीक थीं। उसके बाद अचानक तबीयत बिगड़ी तो वहां मौजूद नर्स और डॉक्टर को जब जानकारी दी तो उन्होंने उसके दर्द को ड्रामा बताया। डॉक्टर ने उसे उठने को कहा और पीठ में मुक्के से दो तीन बार मार कर चलने फिरने को कहा। कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई।