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कॉलेज की क्लास छोड़ सेना में भर्ती होने रांच पहुंच गया था अंकुश

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भोरंज(हमीरपुर)। जिला हमीरपुर की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी मेें बीएससी की पढ़ाई करते-करते एक दिन अंकुश ठाकुर क्लास छोड़ सेना में भर्ती होने के लिए रांची के रामगढ़ पहुंच गया। माता-पिता चाहते थे कि बेटा पहले अपनी बीएससी की पढ़ाई पूरी करे। लेकिन अंकुश में तो बचपन से ही भारतीय सेना में भर्ती होने का जुनून था। जिसके चलते उसका कॉलेज के दौरान पढ़ाई में दिल नहीं लगता था। 24 नवंबर 1998 को हलवदार अनिल कुमार और माता ऊषा देवी के घर जन्मे अंकुश ठाकुर ने उपमंडल भोरंज के राजकीय उच्च पाठशाला मनोह से दसवीं कक्षा तक और उसके बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लदरौर से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई की।
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दस जमा दो की पढ़ाई पूरी करने के बाद माता-पिता ने उसे भोरंज में स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में बीएससी में दाखिला दिलवा दिया। इसी दौरान विवि में पढ़ाई करते हुए वह भारतीय सेना की 3 पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हो गया। अंकुश के पिता हवलदार अनिल कुमार, दादा ऑनरेरी कैप्टन सीता राम और परदाता भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं।
अंकुश परिवार से भारतीय सेना में सेवाएं देने वाली चौथी पीढ़ी थी। करीब सात माह पूर्व ही रंगरूटी छुट्टी काट कर 21 वर्षीय अंकुश ठाकुर ने सियाचिन में ड्यूटी ज्वाइन की थी। लेकिन 15 जून की रात भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा के समीप गलवां में चीनी सैनिकों ने धोखे से भारतीय सेना पर कायरतापूर्ण हमला कर दिया। इस हमले में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए। जिसमें हमीरपुर के उपमंडल भोरंज की ग्राम पंचायत कड़ोहता का शूरवीर अंकुश ठाकुर भी शामिल था। अंकुश ठाकुर ने देश की खातिर शहादत पाई है।
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