कोहड़रा की अंजना गुलेरिया काली गेहूं व देसी लहुसन को बेचते हुए। संवाद
अब अंजना को घर बैठे ही पर मिल रहे ऑर्डर, प्रतिमाह कमा रहीं पांच से छह हजार रुपये
सुशील शर्मा
दियोटसिद्ध (हमीरपुर)। घर की चार दीवारी से बाहर निकल कर खेतों में कदम रखा तो मोटे अनाज की खेती सोना बनकर उगी तो कोहडरा की अंजना गुलेरिया का हौंसला आसमान छूने लगा।
कोहड़रा की अंजना गुलेरिया मिलेट्स (मोटे अनाज) की खेती कर अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं। घर में रहकर गृहिणी अंजना अपनी अलग पहचान बनाना चाहती थी। इसके लिए उन्होंने खेती को चुना। अब वह अलसी और लहसुन के अलावा काली गेंहू की भी खेती कर रही हैं, जिससे अब उन्हें घर पर मोटे अनाज की खरीदारी के लिए ऑर्डर भी आ रहे हैं।
घर पर ऑर्डर मिलने से ही वह अब प्रतिमाह पांच से छह हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। अंजना के पति ट्रैक्टर चलाते हैं, जबकि बुजुर्ग सास-ससुर घर पर बेटी के साथ काम में उनका हाथ बंटाते हैं। उन्होंने इस बार एक साथ देसी लहुसन और काली गेहूं को उगाया है। गेहूं की बाजार में खासी डिमांड रहती है। ऐसे में उन्हें फसल को बेचने के लिए दुकानों का रुख नहीं करना पड़ रहा है।
अभी तक वह गेहूं और लहसुन से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुकी हैं। अंजना ने बताया कि कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं व मोटे अनाज के प्रति लोगों के रुझान को देखते हुए फसल उगाने का निर्णय लिया और परिवार के सदस्यों की सहायता से फसल को उगाने में सफलता प्राप्त की है। मोटे अनाज से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करती है। महिलाएं ऑर्डर देकर घर से ही खरीदारी कर रही हैं।
वस्तु दाम
अलसी
100 रुपये किलो
लहसुन
150 रुपये किलो
काली गेहूं
80 रुपये किलो
गेहूं
40 रुपये किलो
कोहड़रा की अंजना गुलेरिया काली गेहूं व देसी लहुसन को बेचते हुए। संवाद
कोहड़रा की अंजना गुलेरिया काली गेहूं व देसी लहुसन को बेचते हुए। संवाद