कराड़ा पेयजल योजना से 60 गांवों के लोगों को नाले का पानी बिना फिल्टर किए पिलाया जा रहा है। पेयजल योजना में कोई फिल्टर बेड नहीं है। नाले से डायरेक्ट पानी उठाकर योजना के मुख्य जल भंडारण टैंक में डाला जा रहा है। इसके बाद यही पानी लोगों के घरों में सप्लाई किया जा रहा है। इससे लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
कराड़ा पेयजल योजना में पानी के दो स्रोत हैं। इसमें एक नाला और दूसरा कुआं है। कुएं का जल स्तर बढ़ने पर इसका पानी मुख्य जल भंडारण टैंक में लिफ्ट किया जाता है जबकि जल स्तर गिरने पर साथ लगते नाले से पानी लिफ्ट किया जाता है।
पानी लिफ्ट करने के लिए मशीनें पेयजल योजना से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित नाले में लगाई हैं। यहां कोई फिल्टर बेड नहीं है। यहां तक कि मशीनें भी खुले में लगी हैं। यहां कभी भी कोई हादसा हो सकता है। मशीनें लगाने को बनाए गए बाक्स में दूषित पानी जमा है।
पानी को मशीनों से लिफ्ट कर पेयजल योजना के मुख्य टैंक में डाला जाता है। इसके बाद मुख्य टैंक से पानी विभिन्न पंचायतों में बने टैंकों को सप्लाई कर दिया जाता है। मुख्य जल भंडारण टैंक की छत भी टूटी हुई है। दूसरे टैंक पर बनाई छत भी आधी-अधूरी है। यहां मशीनों के किनारे स्लेब कह जगह फुट मैट रखे हैं।
पर्याप्त ब्लीचिंग पाउडर भी नहीं
पेयजल योजना में पानी की क्लोरीनेशन को ब्लीचिंग पाउडर का होना जरूरी है, लेकिन योजना में साल बाद ही कभी ब्लीचिंग पाउडर डाला जाता है। पंप हाउस के कमरे में महज एक बैग ब्लीचिंग पाउडर रखा है जो सीलन पकड़ चुका है और खराब होने की कगार पर है।
कर्मचारियों को शौचालय तक नहीं
पंप हाउस पर करीब आधा दर्जन कर्मचारी अलग-अलग शिफ्टों में सेवाएं देते हैं, लेकिन इनके लिए यहां शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों को खुले में शौच जाना पड़ रहा है जिससे स्वच्छता अभियान को धक्का लग रहा है। पंप हाउस गांव से आधा किलोमीटर दूर नाले में है जहां तेंदुए का आतंक है। कर्मचारियों को रात के समय सप्लाई छोड़ने और बंद करने में परेशानी होती है।
समस्या मेरे ध्यान में आ गई है। इनके समाधान के लिए प्रयास किए जाएंगे। लोगों को साफ पानी देना सुनिश्चित किया जाएगा।
- नीरज भोगल, एक्सईएन, आईपीएच विभाग