ढटवाल तहसील के तहत पटवार वृत्त महारल में 2008-2009 में हुए बंदोबस्त के दौरान पाई गई त्रुटियों की जांच शुरू हो गई है। इस मामले की तहसील के बाशिंदों ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से शिकायत की थी। अमर उजाला ने 27 सितंबर के अंक में विभाग ने बंदोबस्त में बरती खामियां शीर्षक से ग्रामीणों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। बुधवार को नायब तहसीलदार सेटलमेंट बिझड़ी चरणदास नेगी ने मौके पर पहुंचकर लोगों की आपत्तियां सुनीं। उन्होंने बंदोबस्त प्रक्रिया से संबंधित सभी कागजातों को खंगाला। साथ ही उन रास्तों का भी मुआयना किया जिनके बारे में स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री को शिकायत की थी। तहसीलदार ने पाया कि कुछ रास्ते जो कागजों में होने लाजिमी थे उन कागजातों को ठीक से नहीं पढ़ा जा रहा है।
इस मौके पर स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर ही 21 सदस्यीय समिति का गठन किया, जोकि उस समय की जमीनी समस्याओं के बारे में अवगत करवाएगी। साथ ही में विभाग की तरफ से भी इसकी जांच के लिए अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं। बंदोबस्त नायब तहसीलदार चरण सिंह नेगी ने बताया कि अगर बंदोबस्त में तीस प्रतिशत से ज्यादा गलतियां हुईं तो दोबारा बंदोबस्त करवाया जाएगा।
अगर 30 प्रतिशत से कम गलतियां हुई तो दुरुस्ती की जाएगी। बनाई गई समिति में ओंकार सिंह ढटवालिया, अजय कुमार ढटवालिया, चैन सिंह ढटवालिया, लेखराम शर्मा, बाबू राम, राकेश कुमार, भागीरथ ढटवालिया, सुभाष धीमान, ज्ञान चंद, भगतराम शर्मा, विजय धीमान, प्रीतम चंद, ज्ञान चंद शर्मा, पुरुषोत्तम सिंह ढटवालिया, लेखराम चौधरी, रतन चंद चौधरी, तुलसी राम किशन चंद चौधरी आदि शामिल किए गए हैं।