हमीरपुर। अगर आप बार-बार कुछ भूल रहे हैं और कोशिश करने पर भी याद नहीं आ रहा तो अल्जाइमर के लक्षण भी हो सकते हैं। यह कहना है डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती का। मेडिकल काॅलेज एवं अस्पताल में रोजाना करीब तीन मरीज इस बीमारी के आते हैं। पिछले एक साल की बात करें तो इस बीमार से पीड़ित मरीजों की संख्या में एक फीसदी का इजाफा हुआ है। हालांकि, यह बीमारी अनुवांशिक मानी जाती है। इस बीमारी का समय पर इलाज करवाना जरूरी है। विश्वभर में 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाएगा। अल्जाइमर एक मनोवैज्ञानिक रोग है। इसमें घटनाओं को भूल जाना इसका एक प्रारंभिक संकेत है।
इसके बाद बढ़ता भ्रम, अन्य मानसिक कार्यों में हानि और भाषा का उपयोग करने और समझने और दैनिक कार्यों को करने में समस्या होती है। यह लक्षण इस कद्र बढ़ जाते हैं कि लोग काम नहीं कर पाते हैं। वह दूसरों पर पूरी तरह से आश्रित हो जाते हैं। व्यक्ति घटनाओं को भूल जाता है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में भी मनोविज्ञान ओपीडी में इलाज के लिए अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित मरीज आते हैं। एक दिन मेंं दो से चार मरीज डॉॅॅ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में इस बीमारी से पीड़ित पहुंचते हैं। इस बीमारी का कारण आनुवंशिक है। वहीं, इसके बचाव के लिए रक्तचाप को सामान्य बनाए रखना, मधुमेह से बचाव और जब लगे कि व्यक्ति चीजें भूल रहा है तो उसे समय से चिकित्सक या मनोवैज्ञानिक के पास लाना व इलाज करवाना आदि उपया हैं। अल्जाइमर बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग वाले होते हैं। अस्पताल में इस बीमारी में एक फीसदी के करीब बढ़ोतरी हुई है। पूर्व में दिन में एक या दो ही मरीज आते थे। अब दो से चार के बीच मरीज हो जाते हैं। प्रतिदिन मरीजों की संख्या अलग अलग होती है। इस बारे में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल में दो से तीन मरीज इस बीमारी के आते हैं। इस बीमारी का समय पर इलाज करवाना जरूरी है।