हिम-आंचल पेंशनर्ज संघ की प्रदेशस्तरीय कोर-कमेटी की बैठक में लिया निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। यदि सरकार ने पेंशनरों की मांगों को नहीं माना तो 15 दिन के भीतर प्रदेश में सर्वप्रथम हमीरपुर जिला मुख्यालय में प्रदेशस्तरीय पेंशनरों की एक बड़ी रैली निकाली जाएगी। फिर भी सरकार ने पेंशनरों की मांगों के प्रति सजगता और सतर्कता नहीं दिखाई तो संघ अन्य जिलों के मुख्यालयों में भी प्रदेश स्तरीय रैलियां निकलने का कार्यक्रम सुनिश्चित करेगा। इससे सरकार के खिलाफ जन आक्रोश पैदा होगा, जिसका सारा उत्तरदायित्व सरकार पर होगा। हमीरपुर में आयोजित हिम-आंचल पेंशनर्ज संघ की प्रदेशस्तरीय कोर-कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। प्रदेशाध्यक्ष योगराज शर्मा की अध्यक्षता में पेंशनर भवन हमीरपुर में हुई बैठक में काफी संख्या में पदाधिकारी शामिल हुए हैं। बैठक में पेंशनरों की लंबित मांगों पर चर्चा की गई। इसमें पेंशन संशोधन के परिणामस्वरूप मिलने वाले आर्थिक लाभों का वर्षों से भुगतान न हो पाना, महंगाई भत्ते की देय तीन किस्तें जारी न करने, जुलाई 2022 से जारी महंगाई भत्ते की किस्त का 21 माह की बकाया राशि का साल से ज्यादा समय से भुगतान न करने, मेडिकल भत्ते की कई वर्षों से बढ़ोतरी न करना और पेंशनरों के उपचार के चिकित्सा बिलों का समय पर भुगतान न होने संबंधी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया गया। प्रदेश में चल रही आर्थिक तंगी के संबंध में भी मंथन किया गया। बैठक में महासचिव हरनाम सिंह ठाकुर, वित्त सचिव ओम राज कंवर, मुख्य संरक्षक रमेश भारद्वाज, हमीरपुर जिला प्रधान केसी गौतम, चंबा जिला प्रधान शिव कुमार कौड़ा व मदन अरोड़ा, ऊना जिला प्रधान राज कुमार शर्मा, देव राज आदि मौजूद रहे।
आर्थिक संकट है तो फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखे सरकार
वक्ताओं का मत रहा कि अगर प्रदेश में इस प्रकार का कोई संकट है तो सबसे पहले सरकार अपने फिज़ूल के खर्चों पर नियंत्रण रखती और राजनीतिक नियुक्तियों पर कुछ समय तक रोक लगाई जाती। सितंबर में कर्मचारियों को वेतन 5 सितंबर और पेंशनरों को पेंशन 10 सितंबर को मिलने के संबंध में पदाधिकारियों ने सरकार से आग्रह किया कि पेंशनरों व कर्मचारियों को एक साथ ही वेतन व पेंशन की अदायगी की जाए। पेंशनरों की ओर से बैठक में समस्त समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया तथा एकमत से आगामी कार्रवाई की रूपरेखा पर सहमति बनी है कि पहले सरकार को मांगों के बारे में एक ज्ञापन जारी किया जाए। यदि फिर भी सरकार की ओर से पेंशनरों की निरंतर अनदेखी की गई तो पेंशनर जिला स्तर पर प्रदेश स्तरीय रैलियां करने का कार्यक्रम बनाएगी। इसकी घोषणा प्रदेशाध्यक्ष करेंगे।