प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र भोटा के भवन की हालत बदतर हो चुकी है। बारिश के मौसम में वार्ड में उपचाराधीन मरीजों पर बारिश का पानी छत से टपक रहा है। सुविधाओं के अभाव में भोटा और आसपास की आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के मरीज अस्पताल में उपचार करवाने से गुरेज करने लगे हैं।
खस्ताहाल अस्पताल की छत की समस्या कई बार स्वास्थ्य विभाग को बताई जा चुकी है लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। लोगों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर खासा रोष जताया है।
लोगों में अरुण सोनी, अनिल कुमार, रमेश चंद, योग राज, पवन कुमार, बीरबल, अजय कुमार, चंद्र मोहन, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्र भोटा का निर्माण करीब 40 साल पहले हुआ था। इस दौरान भवन पर डाली गई छत की रिपेयर आज तक नहीं की गई है।
आलम यह है कि छत की टीन गलना शुरू हो गई है, लेकिन विभाग इसे ठीक करवाना उचित नहीं समझ रहा। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र में भोटा के अलावा मोरसू सुलतानी, अग्घार, सौर और पाहलू गांव के सैकड़ों मरीज रोजाना स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचते हैं।
अस्पताल में छह बेड का वार्ड भी है। यहां छत की टीन गलने से बारिश का सारा पानी वार्ड में घुस रहा है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।
भोटा अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजित का कहना है कि एक साल पहले भवन एस्टिमेट बनाकर आला अधिकारियों को भेजा है लेकिन अब तक भवन की दशा नहीं सुधर पाई है।
सीएमओ डॉ. सावित्री कटवाल का कहना है कि मामला उनके ध्यान में नहीं था। जल्द ही एस्टिमेट बनाकर छत की मरम्मत करवा दी जाएगी।