ओमान सरकार का सहयोग मिलता है तो जल्द ही बेटे की पार्थिव देह वतन लौट सकेगी। आदित्य की मौत के तीसरे दिन भी उनके घर में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोग गमगीन हैं और पार्थिव देह के इंतजार में परिवारजनों की आंखों के आंसू तक सूख गए हैं। शोक में डूबे परिवार ने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। नम आंखों से दादा अशोक ने कहा कि शिप को पहले ही खतरे की चेतावनी दी गई थी।
इसके बावजूद जहाज को आगे क्यों बढ़ाया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर चेतावनी के बाद उचित कदम उठाए जाते तो शायद आज उनका पोता जीवित होता। पिता राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि आदित्य ने रविवार को फोन पर बताया था कि उनका शिप डेंजर जोन में है। सेना के हेलिकाॅप्टर ने दो बार जहाज को वहां से हटाने और आगे न बढ़ने की चेतावनी दी थी, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने हमले को युद्ध अपराध बताते हुए कहा कि जहाज एक कमर्शियल टैंकर था और उस पर मौजूद सभी लोग निहत्थे थे।
इसके अलावा चाचा संजीव लखनपाल ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि हमले के समय रात करीब साढ़े दस बजे आदित्य को इंजन रूम के पास आखिर कौन-सा कार्य सौंपा गया था। इसकी भी गहन जांच होनी चाहिए। आदित्य के छोटे चाचा हिमांशु शर्मा ने बताया कि उनकी डीजी शिपिंग के अधिकारियों से टेलीफोन पर बातचीत हुई है। कंपनी का दावा है कि जहाज एक स्थान पर खड़ा था, जबकि आदित्य ने अपने पिता को बताया था कि जहाज ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा था
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस क्षेत्र में जहाज संचालित हो रहा था, वहां सुरक्षा की दृष्टि से गार्ड तैनात किए जाने चाहिए थे। कंपनी ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की। डीजी शिपिंग ने परिवार को आश्वस्त किया है कि आदित्य की मौत से जुड़े सभी तथ्यों की गहन जांच की जाएगी। परिजनों का कहना है कि चेतावनियों के बावजूद जहाज को खतरे वाले क्षेत्र में ले जाने और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
ट्रोल करने वालों को जवाब, उनके साथ ऐसा कभी न हो
वहीं, राजेश को एक्स अकाउंट पर अमेरिकन कार्रवाई से जुड़ी पोस्ट में ट्रोल किया जा रहा है। राजेश ने जवाब में कहा कि उन्होंने हमेशा धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर ही सोशल मीडिया पर बातें रखी हैं। ट्रोल करने वालों के साथ भी ऐसा न हो, जैसा उनके साथ हुआ है।