पुलिस थाना बड़सर के स्थान को कभी गऊंआं दा फाटक नाम से जाना जाता था। इस स्थान का बाबा बालक नाथ की कहानियों से जुड़ा है। पुलिस थाना का भवन 1884 में बना है तथा इसकी तिथि थाना के मुख्य द्वार पर अंकित है लेकिन पुलिस थाना में इसके इतिहास के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कहते हैं कि गऊंआं दा फाटक में बाबा बालक नाथ की गऊओं को रखा गया था। चैत्र मास के शुरू होते ही बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में मेले शुरू हो जाते हैं। एक माह तक इन मेलों में पंजाब, हिमाचल सहित उत्तर भारत के लाखों श्रद्धालु बाबा की गुफा में शीश नवाने आते हैं।
बड़सर में गऊंआं के फाटक में बाबा बालक नाथ का मंदिर है। बड़सर में लगभग आठ कनाल भूमि पर पुलिस थाना है। इसमें कार्यालय, आवास तथा मंदिर आता है। मंदिर की देखरेख का जिम्मा थाना प्रभारी के पास रहता है। मंदिर में चढ़ावे तथा पुलिस कर्मचारियों ने अपने सहयोग से तीन सरायों का निर्माण किया है।
दियोटसिद्ध तक पैदल जाने बाले कई श्रद्धालु रात्रि विश्राम को सराएं में ठहरते हैं। ऐतिहासिक धरोहर पुलिस थाने की समय समय पर मरम्मत होती रही है। भवन में टाइलें लगाकर ऐतिहासिक धरोहर को बचाकर रखा है। हालांकि, थाने की छत में लगे स्लेट खराब हो गए हैं। भवन की छत को बदलना जरूरी है।
स्थानीय निवासी लाला ओम चंद वोहरा, अमर नाथ, निक्का राम, चमन लाल सोनी, राम किशन, मनसा राम का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहर को संजोए रखने के लिए सरकार को विशेष बजट मुहैया करवाना चाहिए।
बड़सर डीएसपी राजेंद्र जसवाल ने बताया कि पुलिस थाने में इतिहास का कोई रिकार्ड नहीं है। भवन की छत बदलने के लिए छह लाख का एस्टिमेट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है।