फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hamirpur (Himachal) News: एक ही दिन में बदल गई महिला मरीज की एचबी रिपोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
क्रस्ना लैब की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
विज्ञापन

पहले दिन बताया 9.6 ग्राम एचबी, दूसरे ही दिन हो गया 10.6 ग्राम

हमीरपुर के वार्ड नंबर चार निवासी गोपाल सिंह ने लैब की रिपोर्टों पर उठाए सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में संचालित क्रस्ना लैब में टेस्ट रिपोर्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। एक दिन के भीतर ही महिला मरीज की एचबी जांच की रिपोर्ट में अंतर पाया गया है। इस पर महिला मरीज के पति ने लैब की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, लैब प्रबंधन का तर्क है कि कई बार मरीज डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से प्रभावित होते हैं तो एचबी की रिपोर्ट में अंतर आ जाता है। हमीरपुर के वार्ड नंबर चार निवासी गोपाल सिंह ने कहा कि उनकी पत्नी का इलाज पीजीआई में किया जा रहा है। जब उन्हें वहां जाना होता है तो उससे पहले वह मेडिकल कॉलेज में शुगर जांच के लिए हिमोग्लोबिन की भी जांच करवाते हैं। इसके लिए उन्होंने 16 जुलाई को अस्पताल की क्रस्ना लैब में रक्त की जांच करवाई। इसमें 9.6 ग्राम एचबी पाया गया। इस पर उन्हें संदेह था। इसलिए उन्होंने 17 जुलाई को दोबारा क्रस्ना लैब से टेस्ट करवाया। इसकी रिपोर्ट वीरवार को ली। इसमें महिला का एचबी 10.6 ग्राम पाया गया। ऐसे में उन्होंने इसकी शिकायत अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय को की। वार्ड नंबर चार निवासी गोपाल सिंह ने कहा कि एक दिन में कैसे किसी के हिमोग्लोबिन में परिवर्तन हो सकता है। शुगर आदि होने पर व्यक्ति दवाइयां लेता है लेकिन जब सैंपल की रिपोर्ट ही सही नहीं पाई जाएगी तो व्यक्ति कैसे वहां पर टेस्ट करवा सकता है। अस्पताल में क्रस्ना लैब में सरकारी कीमतों पर टेस्ट किए जाते हैं। इस लैब के बाहर लंबी कतारें लगी रहती हैं और अधिकतर मरीज यहां पर टेस्ट करवाते हैं लेकिन जब टेस्टों की रिपोर्ट ही सही नहीं होगी तो मरीजों का इलाज किस आधार पर होगा, यह चिंता का विषय है। चिकित्सक तो टेस्टों की रिपोर्ट देखकर ही मरीजों को दवाइयां आदि देते हैं। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि इसके लिए क्रस्ना लैब प्रबंधन जवाबदेह है। इस बारे में क्रस्ना लैब के अधिकारी धीरज ने कहा कि वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के समक्ष ही रिपोर्ट पर चर्चा की गई। चिकित्सकों का कहना था कि शरीर में डिहाइड्रेशन के कारण ऐसा होता है कि एचबी में कुछ अंतर आ जाता है। रिपोर्ट सही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें