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हिमाचल: हमीरपुर के छात्र सर्वेश शर्मा के ड्रोन पर सस्पेंस, कॉलेज में किसी ने नहीं देखा प्रोटोटाइप

Mon, 02 Nov 2026 12:26 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)

सार

हमीरपुर में छात्र सर्वेश शर्मा के 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट से ड्रोन तैयार करने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं। कॉलेज में अब तक किसी ने ड्रोन का प्रोटोटाइप देखने की पुष्टि नहीं की है। तकनीकी शिक्षा विभाग की जांच कमेटी को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी है।
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सर्वेश शर्मा - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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सेना के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट से ड्रोन तैयार करने का दावा करने वाले छात्र सर्वेश शर्मा का प्रोजेक्ट अब जांच के घेरे में है। कॉलेज में सर्वेश के बहुचर्चित ड्रोन का प्रोटोटाइप किसी ने नहीं देखा है। 22 सितंबर को सरकारी एजेंसी की ओर से जारी प्रेस नोट और वीडियो फुटेज में भी छात्र ने ड्रोन की कोई तस्वीर या वीडियो साझा नहीं किया था।

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इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग की कमेटी सोमवार को संस्थान पहुंच सकती है। कमेटी को मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। एजेंसी को उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों में केवल आईआईटी जोधपुर की प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल करने का प्रमाण पत्र शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

व्हाट्सएप ग्रुप में साझा संदेश भी जांच के दायरे में
जांच कमेटी 28 अक्तूबर को कॉलेज के विद्यार्थियों के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए संदेश और उसके बाद हुए घटनाक्रम की भी पड़ताल करेगी। जानकारी के अनुसार, उस दिन सुबह करीब 11 बजे सर्वेश कॉलेज के प्राचार्य से मिला था। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे विद्यार्थियों के व्हाट्सएप ग्रुप में डीआईओ और आईडैक्स की एक्स पोस्ट के स्क्रीनशॉट साझा किए गए। इन पोस्ट में फंडिंग मंजूर होने के दावे की पुष्टि नहीं की गई थी। इसके बाद सर्वेश के कमरे में बंद होने और फिर तीसरी मंजिल की बालकनी से नीचे गिरकर घायल होने की घटना सामने आई। जांच कमेटी इस पूरे घटनाक्रम के क्रम और इससे जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी।

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22 सितंबर के प्रेस नोट में किया गया था 3.5 करोड़ की ग्रांट का दावा
22 सितंबर को जारी सरकारी प्रेस नोट में दावा किया गया था कि सर्वेश शर्मा को रक्षा मंत्रालय की ओर से ड्रोन प्रोजेक्ट के लिए 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट और प्रतियोगिता में 10 लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। हालांकि, डीआईओ की ओर से ग्रांट की पुष्टि नहीं की गई। सर्वेश ने 27 अक्तूबर को डीआईओ को ईमेल भेजकर साइबर ठगी की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब तकनीकी शिक्षा विभाग की जांच कमेटी यह पता लगाएगी कि ड्रोन प्रोजेक्ट, कथित फंडिंग, प्रतियोगिता में मिली उपलब्धि और संबंधित दस्तावेजों के दावों में कितनी सच्चाई है।
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