सेना के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट से ड्रोन तैयार करने का दावा करने वाले छात्र सर्वेश शर्मा का प्रोजेक्ट अब जांच के घेरे में है। कॉलेज में सर्वेश के बहुचर्चित ड्रोन का प्रोटोटाइप किसी ने नहीं देखा है। 22 सितंबर को सरकारी एजेंसी की ओर से जारी प्रेस नोट और वीडियो फुटेज में भी छात्र ने ड्रोन की कोई तस्वीर या वीडियो साझा नहीं किया था।
इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग की कमेटी सोमवार को संस्थान पहुंच सकती है। कमेटी को मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। एजेंसी को उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों में केवल आईआईटी जोधपुर की प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल करने का प्रमाण पत्र शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
व्हाट्सएप ग्रुप में साझा संदेश भी जांच के दायरे में
जांच कमेटी 28 अक्तूबर को कॉलेज के विद्यार्थियों के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए संदेश और उसके बाद हुए घटनाक्रम की भी पड़ताल करेगी। जानकारी के अनुसार, उस दिन सुबह करीब 11 बजे सर्वेश कॉलेज के प्राचार्य से मिला था। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे विद्यार्थियों के व्हाट्सएप ग्रुप में डीआईओ और आईडैक्स की एक्स पोस्ट के स्क्रीनशॉट साझा किए गए। इन पोस्ट में फंडिंग मंजूर होने के दावे की पुष्टि नहीं की गई थी। इसके बाद सर्वेश के कमरे में बंद होने और फिर तीसरी मंजिल की बालकनी से नीचे गिरकर घायल होने की घटना सामने आई। जांच कमेटी इस पूरे घटनाक्रम के क्रम और इससे जुड़े तथ्यों की पड़ताल करेगी।