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द गुरयाह कोऑपरेटिव सोसायटी: पांच करोड़ का फर्जी ऋण और इतना ही ब्याज, जिनके नाम जारी हुआ उन्हें पता तक नहीं

Fri, 25 Sep 2026 09:54 AM IST
Ankesh Dogra कमलेश रतन भारद्वाज, हमीरपुर।

सार

Gurayah Cooperative Society Fake Loan Scam Hamirpur: हमीरपुर की द गुरयाह कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विसेज सोसायटी में 10.38 करोड़ रुपये के गबन के मामले में फर्जी ऋण आवंटन का बड़ा खुलासा हुआ है। विभागीय जांच के अनुसार वर्ष 2010 से 2022 के बीच 50 से अधिक खाताधारकों के नाम पर करीब पांच करोड़ रुपये के ऋण कथित तौर पर फर्जी तरीके से जारी किए गए। विस्तार से पढ़ें...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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द गुरयाह कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विसेज सोसायटी में सामने आए 10.38 करोड़ रुपये के गबन के मामले में फर्जी ऋण आवंटन की परतें खुलने लगी हैं। विभागीय जांच में सामने आया है कि एक दशक से अधिक समय तक कथित तौर पर फर्जी ऋण जारी किए जाते रहे। वर्ष 2010 से 2022 के बीच सोसायटी के 50 से अधिक खाताधारकों के नाम पर करीब पांच करोड़ रुपये के ऋण जारी किए गए।

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हैरानी की बात यह है कि जिन खाताधारकों के नाम पर ये ऋण जारी किए गए, उनमें से कुछ को इसकी जानकारी तक नहीं थी। जांच में सामने आया कि कुछ ऋण खाताधारकों की एफडी के आधार पर जारी किए गए थे। बाद में इन ऋणों पर ब्याज जुड़ता गया और कुल देनदारी करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

पांच करोड़ का ऋण, ब्याज भी करीब पांच करोड़
विभागीय जांच के अनुसार, फर्जी तरीके से जारी किए गए ऋण की मूल राशि करीब पांच करोड़ रुपये थी। लंबे समय तक ब्याज जुड़ने के कारण इसकी देनदारी लगभग दोगुनी होकर 10 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई। इसके अलावा खाताधारकों के खातों में करीब 51 लाख रुपये की अन्य वित्तीय गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। इस तरह सोसायटी में सामने आया पूरा वित्तीय अनियमितता का मामला 10.38 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।
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एफडी के आधार पर जारी किए ऋण
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ ऋण खाताधारकों की एफडी के आधार पर जारी किए गए। संबंधित खाताधारकों को इसकी जानकारी नहीं थी। जांच के दौरान तत्कालीन सचिव अश्वनी कुमार ऋण से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सके। वर्ष 2023-24 के ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद विभागीय जांच शुरू हुई। मार्च 2023 में अश्वनी कुमार को निलंबित किया गया था, जबकि मार्च 2024 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।

2024-25 और 2025-26 का ऑडिट अभी जारी
मामले की जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 का ऑडिट जारी है। विभाग को आशंका है कि आगे की जांच में भी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं। विभागीय टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। अब विजिलेंस को भी जांच के लिए पत्राचार किया गया है।

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प्रधान बोले- लंबे समय से चल रहा था फर्जी ऋण का खेल
द गुरयाह कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विसेज सोसायटी के प्रधान प्रदीप ने बताया कि लंबे समय से फर्जी ऋण जारी किए जा रहे थे। उनके अनुसार, वर्ष 2020 में प्रधान बनने के बाद मामले को लेकर संदेह हुआ। कोरोना काल के दो वर्षों के बाद सचिव अश्वनी कुमार के खिलाफ विभाग से जांच की सिफारिश की गई और उन्हें बर्खास्त करने का प्रस्ताव भी दिया गया।

प्रदीप के अनुसार, करीब पांच करोड़ रुपये के फर्जी ऋण खाताधारकों की एफडी के आधार पर जारी किए गए, जबकि संबंधित लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सचिव ऋण से संबंधित दस्तावेज भी पेश नहीं कर सके। उनके अनुसार, ब्याज सहित ऋण की राशि करीब 10 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है।

पूर्व सचिव बोले- कुछ ऋणों की रिकवरी की गई
वहीं, सोसायटी के पूर्व सचिव अश्वनी कुमार ने कहा कि मामले की जांच में विभाग को पूरा सहयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ ऋणों की रिकवरी की गई है और बाकी बचे ऋणों की रिकवरी भी की जाएगी। फिलहाल विभागीय ऑडिट और जांच जारी है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि सोसायटी में वित्तीय अनियमितताओं का दायरा कितना बड़ा है। साथ ही विजिलेंस जांच से भी मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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