प्राचार्य चंद्रशेखर के अनुसार, संस्थान को रक्षा अधिकारियों के नाम से कुछ ईमेल प्राप्त हुए थे। छात्र सर्वेश शर्मा के पास भी ऐसे दस्तावेज थे, जिन्हें रक्षा मंत्रालय से संबंधित बताया गया था। 16 अक्तूबर को सेना की ओर से संस्थान को फोन आया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू की। 27 अक्तूबर को सेना के अधिकारियों ने छात्र का रिकॉर्ड मांगा और उससे बातचीत भी की।
इस स्पष्टीकरण के बाद संस्थान प्रबंधन ने पुलिस से संपर्क किया। प्राचार्य की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319 और 336(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस कथित ग्रांट मंजूरी से जुड़े दस्तावेजों, करीब 40 पन्नों के अनुबंध, ईमेल और डिजिटल संदेशों की जांच कर रही है। शुरुआती आशंका है कि छात्र को ऑनलाइन माध्यम से ग्रांट स्वीकृत होने का भरोसा दिलाया गया। हालांकि, दस्तावेजों के पीछे किसकी भूमिका है, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।