हमीरपुर। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अब नगर निकाय हमीरपुर में भी बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन के रुझान को दिखने को मिल सकते हैं। क्योंकि हमीरपुर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का गृह जिला है।
नगर परिषद हमीरपुर में वार्ड नंबर दो के पार्षद राजकुमार के कुर्सी से हटने के बाद नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर भी संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। क्योंकि भाजपा समर्थित वार्ड नंबर दो के पार्षद के चुनाव को एसडीएम हमीरपुर की अदालत ने बुधवार को रद्द कर दिया है। उन पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप एसडीएम की अदालत में साबित होने पर यह कार्रवाई हुई है।
अब वार्ड नंबर दो में उपचुनाव होना तय माना जा रहा है। भाजपा समर्थित वार्ड नंबर दो के पार्षद के कुर्सी से हटने के बाद अब भाजपा नगर परिषद में अल्पमत में आ गई है। नगर परिषद हमीरपुर में कुल 11 वार्ड हैं। इसमें भाजपा समर्थित पार्षदों की संख्या अब चार रह गई है जबकि निर्दलीय पार्षदों की संख्या भी चार है। वहीं, कांग्रेस समर्थित वार्ड पार्षदों की संख्या दो है। अगर वार्ड नंबर दो में उपचुनाव होते हैं और यहां से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीतता है तो कांग्रेस आसानी से भाजपा समर्थित अध्यक्ष को हटा सकेगी लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस जोड़-तोड़ की फिराक में है। वर्तमान में वार्ड नंबर एक नीना चौधरी और पांच से राधारानी दोनों कांग्रेस समर्थित पार्षद हैं जबकि वार्ड नंबर चार में संदीप भारद्वाज, वार्ड नंबर छह में सुदेश कुमारी आनंद, वार्ड नंबर आठ में विनय कुमार और वार्ड नंबर दस में डॉ. सुशील कुमार चारों निर्दलीय चुनाव जीते हुए हैं। वर्तमान में वार्ड नंबर तीन में डिंपल बाला, वार्ड नंबर सात से मनोज कुमार मिन्हास, वार्ड नंबर नौ में पुष्पा शर्मा और वार्ड नंबर 11 में वकील सिंह यह चारों ही भाजपा समर्थित पार्षद हैं। अगर कांग्रेस के दो पार्षदों को चार निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलता है, तो परिणाम रोचक हो सकते हैं। वहीं, निर्दलीय पार्षद भी एकजुट हो गए हैं। ताकि कांग्रेस समर्थित पार्षदों के समर्थन से अध्यक्ष पद पर किसी एक निर्दलीय पार्षद को अध्यक्ष बनाया जा सके। वर्ष, 2021 में उपाध्यक्ष की कुर्सी पर निर्दलीय पार्षद संदीप भारद्वाज को बैठाकर ही भाजपा ने वार्ड नंबर सात से अपने पार्षद मनोज मिन्हास को अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया था लेकिन अब देखना दिलचस्प रहेगा कि जिला कांग्रेस और ब्लॉक कांग्रेस में बैठे पदाधिकारी मुख्यमंत्री के गृह जिला में नगर परिषद के अध्यक्ष की कुर्सी से भाजपा समर्थित पार्षद को हटाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं। यहां इस मामले में परीक्षा जिला कांग्रेस और ब्लॉक कांग्रेस के अलावा कांग्रेस विधायकों की भी होगी।