कोरोना के बाद जड़ी-बूटियों और पारंपरिक उपचार की ओर रुझान बढ़ा
ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचने से आयुष प्रणाली को मिला बल
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले में संचालित करीब 70 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आयुर्वेदिक विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में जहां कुल 2,19,717 मरीजों की ओपीडी दर्ज की गई थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 3,42,357 तक पहुंच गई। इस प्रकार पांच वर्षों में 1,22,640 मरीजों की वृद्धि दर्ज की गई है।
यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि लोग अब एलोपैथिक उपचार के साथ-साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। विशेष रूप से कोरोना काल के दौरान जड़ी-बूटियों से बने काढ़ा और चूर्ण के उपयोग ने लोगों को आयुर्वेद की प्रभावशीलता का एहसास कराया, जिसके बाद इसका रुझान लगातार बढ़ता गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेदिक उपचार में दवाओं के अपेक्षाकृत कम दुष्प्रभाव, रोग की जड़ तक पहुंचकर उपचार करने की क्षमता और जीवनशैली सुधार पर जोर दिए जाने के कारण मरीज इस पद्धति की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
इसके अलावा, सरकार द्वारा आयुष सेवाओं को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों ने भी आयुर्वेद के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार, मौसमी बीमारियों, पाचन संबंधी समस्याओं, त्वचा रोगों और जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए बड़ी संख्या में मरीज आयुर्वेदिक केंद्रों का रुख कर रहे हैं।
बॉक्स
किस वर्ष कितनी ओपीडी हुई
वर्ष 2020-2021 में 2,19,717 मरीजों ने अपना इलाज करवाया। वहीं 2021-2022 में 226,609, 2022-2023 में 301750, 2023-2024 में 357674, 2024-2025 में 340908 ओपीडी हुई। वहीं 2025-2026 में 342357 मरीजों की ओपीडी आयुर्वेदिक संस्थानों में हुई।
कोट
-आुयर्वेदिक दवाइयों से किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता है। आयुर्वेद में रोग स्थायी रूप से मिट जाता है।-राजेश कालिया, जिला आयुष अधिकारी