हमीरपुर। जिले में ढाबा संचालकों और फास्ट फूड दुकानों पर आग से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह शून्य नजर आ रही है। सर्दियों में सिलिंडर जाम होने या गैस कम होने की स्थिति में मुख्य बाजार स्थित बाल स्कूल के समीप एक दुकान पर सिलिंडर को नाली की जाली पर टेढ़ा रख दिया गया ताकि चूल्हे तक गैस पहुंच सके। सिलिंडर के इस तरह के प्रयोग से दुकानदारों में सुरक्षा को लेकर जागरूकता के स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह हाल जिला मुख्यालय नहीं बल्कि जिला के हर छोटे-बड़े बाजार के हैं।
छोटी-छोटी दुकानों और ढाबों में अग्निशामक यंत्र तो दूर, सिलिंडर के सुरक्षित और आधारभूत प्रयोग की जानकारी भी नहीं है। शहर में यदि कहीं आग की घटना घटित होती है तो लोगों के पास केवल दमकल विभाग की गाड़ियों का ही सहारा बचता है। तंग गलियों वाले बाजार क्षेत्रों में जहां दमकल विभाग का पहुंचना मुश्किल होता है, वहां यह लापरवाही और भी अधिक घातक साबित हो सकती है। ढाबा संचालकों के पास न तो वाटर हाइड्रेंट की सुविधा है और न ही फायर एक्सटिंग्विशर की व्यवस्था। कई संस्थानों में यदि अग्निशामक यंत्र लगे भी हैं तो उन पर नवीनीकरण की तिथि अंकित नहीं है। ऐसे में आपात स्थिति में ये यंत्र भी जवाब दे सकते हैं।
100 से अधिक ढाबों व दुकानों में सिलिंडर का प्रयोग
हमीरपुर शहर में 100 से अधिक ढाबे, फास्ट फूड कॉर्नर और मिठाई की दुकानें हैं, जहां गैस सिलिंडरों का प्रयोग किया जाता है लेकिन सुरक्षा के नाम पर केवल नाममात्र की जानकारी ही उपलब्ध है। किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। हैरानी की बात यह है कि अग्निशमन विभाग के अधिकारी भी इन दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था जांचने के लिए नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि दुकान संचालक भी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
कई दुकानों में एक ही सिलिंडर के पास दूसरा सिलिंडर रखा गया है जबकि नियमानुसार सिलिंडरों के बीच कम से कम 10 फीट की दूरी होना अनिवार्य है। यदि दो से अधिक सिलिंडर हों तो उन्हें अलग कमरे में रखना जरूरी है। बावजूद इसके, सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। निरीक्षण के दौरान अधिकांश ढाबों, फास्ट फूड कॉर्नरों और मिठाई की दुकानों पर किसी भी तरह की प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई।
आग से निपटने के लिए अग्निशामक यंत्र होना अनिवार्य है। इसमें कम से कम 4.5 किलोग्राम क्षमता का फायर एक्सटिंग्विशर होना चाहिए। इनका समय-समय पर नवीनीकरण भी जरूरी है। एनओसी जारी करते समय इसकी जांच की जाती है।
-प्रेम चंद, प्रभारी, अग्निशमन विभाग, हमीरपुर