जाहू (हमीरपुर)। आधुनिक तकनीक एफडीआर (फुल डेप्थ रेक्लेमेशन) से बन रही बस्सी-तताहर वाया भरेड़ी, चंदरूही सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। सड़क के किनारे डंगों का निर्माण और पानी की निकासी के लिए पुलियों का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है।
निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य गुणवत्ता मॉनीटरिंग टीम ने लोक निर्माण विभाग उपमंडल भोरंज का सोमवार को दौरा किया। इस दौरान लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत चीफ इंजीनियर आरपी वर्मा के नेतृत्व में टीम ने बस्सी से तताहर सड़क के निर्माण कार्य का जायजा लिया।
टीम ने बैलग गांव में डगों के निर्माण का निरीक्षण किया और निर्माण सामग्री में रेत-बजरी के सैंपल भी लिए। इसके बाद नंगरोटा खड्ड बाजार और भरेड़ी में चल रहे कार्यों का भी निरीक्षण किया। चंदरूही में नाले पर बन रहे पुल के निर्माण कार्य को देखा और वहां भी रेत-बजरी का सैंपल लिया।
लोक निर्माण विभाग मंडल भोरंज के अधिशासी अभियंता केके भारद्वाज, सहायक अभियंता राजेश कुमार, और भरेड़ी अनुभाग के कनिष्ठ अभियंता प्रवीण कुमार भी इस निरीक्षण में शामिल रहे। अधिशासी अभियंता केके भारद्वाज ने कहा कि निरीक्षण की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।
एफडीआर तकनीक क्या है?
एफडीआर तकनीक के तहत पुरानी रोड का उच्चीकरण किया जाता है। इसमें पुरानी रोड की गिट्टी समेत अन्य चीजों का ही इस्तेमाल किया जाता है। सड़क को जापान और नीदरलैंड की मशीन से सीमेंट और एडिटिव को मिक्स करके बनाया जाता है। इसके बाद एक लेयर केमिकल की बिछाई जाती है। विदेशों में इसी तकनीक से रोड को बनाया जाता है। इस तकनीक से बनी सड़क की लाइफ दस साल होती है जबकि सामान्य तरीके से बनी सड़क की लाइफ पांच साल होती है।