हमीरपुर। बीमार बेटी को लेकर मेडिकल कॉलेज हमीरपुर पहुंचे एक पिता को अस्पताल का स्टाफ दो घंटे तक इधर-उधर भटकाता रहा। मगर फिर भी बेटी को उपचार नहीं मिल सका। इसके बाद मजबूर होकर पिता को निजी अस्पताल में ले जाकर बीमार बेटी को उपचार करवाना पड़ा। मामला मंगलवार को बताया जा रहा है, लेकिन बुधवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के पास शिकायत पहुंचने का इसका खुलासा हुआ है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार दोपहर को रंगस निवासी सुरेंद्र कुमार अपनी 21 वर्षीय बेटी को लेकर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के आपातकालीन वार्ड में पहुंचा था। बेटी को पेट दर्द हो रही थी। उन्होंने कहा कि जब बेटी को आपातकालीन वार्ड दिखाने गए तो मरीज को देखने के बजाए डॉक्टर अन्य कार्यों में ही व्यस्त रहा। बाद में पूछने पर परिजनों ने दर्द के बारे बताया तो बिना शुरुआती जांच के ही उन्हें अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर 408 में भेज दिया गया।
सुरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि जैसे-तैसे बेटी को लेकर कमरा नंबर 408 पहुंचे तो वहां से धरातल में स्थित कमरा नंबर 104 में जाने के लिए कहा। वहां से 104 में करीब सवा तीन बजे ओपीडी में पहुंचे तो भीड़ होने के चलते सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर ही नहीं जाने दिया। उधर, बेटी लगातार दर्द से कराह रही थी। काफी देर के बाद बेटी को अंदर भिजवाया। ओपीडी में बैठे डॉक्टर ने दो टेस्ट करवाने के लिए लिखा।
उन्होंने कहा कि जब 10 मिनट में ही संबंधित टेस्ट करवाने के बाद कमरा नंबर 104 में करीब चार बजे पहुंचे तो वहां ताला लटका था। संबंधित डॉक्टर ने यह तक नहीं बताया कि टेस्ट रिपोर्ट कहां दिखानी है। फिर दोबारा 408 में पहुंचे तो वहां डॉक्टर ने एक और टेस्ट करवाने की सलाह दी।जब दूसरी बार टेस्ट करवाकर 408 में पहुंचे तो बताया गया कि डॉक्टर ओटी में चले गए हैं। इससे बेटी का उपचार ही नहीं हो सका।
उन्होंने आरोप लगाया कि आपातकालीन स्थिति में उपचार लेने पहुंचने पर उन्हें दो घंटे से इधर से उधर भटकाया गया। थक हार कर उन्हें निजी अस्पताल में बेटी का उपचार करवाना पड़ा।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती के अनुसार आपातकालीन वार्ड में केवल एमबीबीएस डॉक्टर होता है। वहां कोई विशेषज्ञ नहीं होता। यदि इस तरह का मामला सामने आया है तो इसकी जांच की जाएगी।