हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश वन विभाग की एकीकृत विकास योजना के सार्थक नतीजे हमीरपुर जिले में सामने आए हैं। जिले के दर्जनों गांवों में बारिश के पानी को छतों के जरिये टैंक में स्टोर कर खेती को आबाद किया गया है। इन पंचायतों में खेती छोड़ चुके किसान फिर खेती की तरफ रुख कर रहे हैं। जिले के बड़सर, भोरंज और हमीरपुर की पंचायतों में बारिश का जल संग्रहण कर खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। योजना के तहत जिले की 37 पंचायतों के दर्जनों सूखा ग्रस्त गांवों में फिर से कृषि की हरियाली नजर आने लगी है। पारंपरिक खेती के साथ ही इन पंचायतों में अब बारिश के पानी को घरों की छतों से संग्रहीत कर खेती के लिए प्रयोग किया जा रहा है।
हमीरपुर जिले में एक साल में 125 जल भंडारण टैंकों का निर्माण किया गया है जबकि आगामी एक साल में 150 टैंकों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे गांव जहां पर पानी की किल्लत है और दूरस्थ प्राकृतिक जलस्त्रोतों से पानी पहुंचाना मुश्किल है, वहां चार से पांच परिवारों के घरों का समूह बनाकर स्टोरेज टैंक से छतों को कनेक्ट किया गया है ताकि बारिश के पानी को स्टोर किया जा सके। अब इन गांवों में यह किसान मिलजुलकर सब्जियां इत्यादि भी उगा रहे हैं। टैंकों के निर्माण के साथ ही इन पंचायतों में कृषि उपकरण भी अनुदान पर मुहैया करवाए गए हैं। 54 परिवार ऐसे हैं जिन्हें यह कृषि उपकरण अनुदान पर दिए गए हैं। कई तरह के उपकरण इस साल भी किसानों को उपलब्ध करवाए जाएंगे।
डीपीओ आईडीपी वन विभाग संगीता चंदेल ने कहा कि जिले में प्रोजेक्ट के तहत 37 पंचायतों को लिया गया है। इन पंचायतों में बारिश के पानी को घरों की छतों के माध्यम से संग्रहीत किया गया है। इन पंचायतों में किसान इस पानी से सिंचाई कर खेती कर रहे हैं। प्रोजेक्ट के तहत किसानों को उपकरण पर अनुदान पर दिए जा रहे हैं।