हमीरपुर। खेतों में ट्रैक्टरों के बढ़ते प्रचलन ने बैलों की उपयोगिता को लगभग समाप्त कर दिया है। इसका असर पशुपालन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। किसान अब बैल नहीं बल्कि बछड़ी चाहते हैं, क्योंकि दूध देने वाली गाय उनके लिए आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी साबित हो रही है।
इसी बदलती सोच के चलते पशुपालन विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे सेक्स-सॉर्टेड सीमन (विशेष टीके) को जिले में लगातार अच्छा रुझान मिल रहा है। वर्ष 2022 में शुरू की गई इस सुविधा के तहत अब तक जिले में 4,150 डोज उपलब्ध कराई गई हैं।
इनमें से 3,750 डोज का उपयोग किया जा चुका है, जबकि 400 डोज शेष हैं। विभाग के अनुसार यह तकनीक किसानों को डेयरी व्यवसाय की ओर आकर्षित कर रही है और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा दे रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स-सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराने पर सामान्य सीमन की तुलना में मादा बछड़ी के जन्म की संभावना अधिक रहती है। मादा बछड़ी आगे चलकर दूध देने वाली गाय बनती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। यही कारण है कि डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसान इस तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।
आधुनिक कृषि उपकरणों के बढ़ते उपयोग से खेती का स्वरूप बदलने के साथ पशुपालन की प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। अब किसानों का ध्यान बेहतर नस्ल, अधिक दुग्ध उत्पादन और स्थायी आय पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ने के साथ डेयरी व्यवसाय को भी मजबूती मिलेगी।
बढ़ रही लावारिस गोवंश की चुनौती
खेती में बैलों की उपयोगिता घटने का दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है। बैलों की आवश्यकता कम होने के कारण बड़ी संख्या में उन्हें लावारिस छोड़ दिया जा रहा है। जिले में वर्तमान में 28 गोशालाओं में करीब 2,300 गोवंश आश्रय लिए हुए हैं, जबकि लगभग 1,200 लावारिस गोवंश अब भी सड़कों और खेतों में घूम रहे हैं। इनमें अधिकांश बैल हैं। इससे किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
पशुपालन विभाग के माध्यम से सेक्स-सॉर्टेड सीमन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में अब तक 3,750 डोज का उपयोग किया जा चुका है और किसानों का रुझान इस तकनीक की ओर लगातार बढ़ रहा है। डॉ. सुजय शर्मा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, हमीरपुर