ल का निरीक्षण कर बाहर निकलते डीआईजी जेल।
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जिला कारागार में बंदियों को घटिया भोजन देने, मुलाकात में पैसे लिए जाने जैसी शिकायतों की जांच करने मंगलवार को डीआईजी जेल मुख्यालय आए। जिला कारागार का निरीक्षण साढ़े तीन घंटे तक किया। बंदियों व जेल प्रशासन के कर्मियों के बयान दर्ज किए।
इलाहाबाद जोन के डीआईजी कारागार बीआर वर्मा ने बताया कि पूर्व में दो गुमनाम शिकायतें उनके पास आईं हैं। इसमें बंदियों को घटिया किस्म का भोजन देने, मुलाकात में पैसों की मांग करने आदि शिकायतें शामिल हैं। बताया कि इन्हीं जांचों के निरीक्षण में वह मुख्यालय आए हैं। जहां करीब साढे़ तीन घंटे जेल के अंदर रहकर बैरकों, व्यवस्थाएं, मेस, कैंटीन, शौचालय, साफ-सफाई आदि को देखा।
शिकायतों के मामलों में उन्होंने सभी बैरकों में जाकर बंदियों और फिर जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर आदि के बयान दर्ज किए। जेल अधीक्षक ने डीआईजी से सिपाहियों की कमी के साथ अस्पताल में गंभीर बीमारियों की दवाओं को उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही कहा कि गंभीर बीमारी जैसे कैंसर आदि की चिकित्सीय सुविधा बाहर से कराने के लिए बंदियों को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की गई है।
डीआईजी जेल प्राइवेट वाहन इनोवा से मुख्यालय पहुंचे। उनके वाहन में न तो नीली बत्ती लगी थी और न ही नाम पट्टिका थी। मगर ठीक इसके विपरीत जेल अधीक्षक के निजी वाहन में नीली बत्ती लगी है। इसे डीआईजी जेल ने नियम खिलाफ बताते हुए कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
जेल में क्षमता से अधिक बंदियों की संख्या के मामले में जेल डीआईजी ने कहा कि यह समस्या पूरे प्रदेश की जेलों की है। सबसे खराब दशा तो नैनी जेल की है। बताया कि यहां की जेल में बंदियों की संख्या क्षमता से थोड़ी ज्यादा है।