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दुर्घटनाओं में मारे गए बिजली कर्मियों को मुआवजा न देने पर संघ खफा

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नादौन (हमीरपुर)। राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड में विभिन्न दुर्घटनाओं में मारे गए कर्मचारियों के परिजनों को कर्मचारी अधिनियम 1923 के तहत मुआवजे की अदायगी नहीं की जा रही है। यह बात बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने नादौन में पत्रकार वार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि केवल वृत्त कार्यालय हमीरपुर के अंदर ही 6 ऐसे मामले हैं जिनके काम करते समय करंट लगने से मौत हुई है और प्रदेश स्तर पर ऐसे अनेकों मामले हैं जिनमें मृतक कर्मचारियों के परिजनों को मुआवजा राशि से महरूम रखा गया है। जबकि कई मामलों में 4, 5 साल का वक्त गुजर चुका है। खरवाड़ा ने कहा कि 20 मई 2017 को तत्कालीन सरकार ने ऐसी दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को फौरी तौर पर आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए नीति बनाई गई थी। जिसके तहत अनुबंध कर्मचारियों को 5 लाख और नियमित कर्मचारियों को 10 लाख की अदायगी करनी थी और मुआवजा अधिनियम 1923 के तहत मुआवजा अलग से मिलना है। लेकिन बिजली बोर्ड में मात्र 5 व 10 लाख की आर्थिक सहायता देकर मुआवजा राशि से पल्ला झाड़ा जा रहा है। जबकि अनुबंध कर्मचारियों को मामलों में तो पेंशन की सुविधा भी न होने से इन परिवारों की स्थिति और बदतर होती जा रही है। खरवाड़ा ने कहा कि बिजली बोर्ड का प्रबंधक वर्ग प्राथमिकता के आधार पर इन परिवारों को मुआवजा अदायगी की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि बोर्ड में करूणामूलक आधार पर सैकड़ों मामले लंबित हैं। जबकि 2014 के बाद बिजली बोर्ड लिमिटेड में हुई नई भर्ती के आधार पर 5 प्रतिशत पद करूणामूलक आधार पर भरे जाने थे। उन्होंने बोर्ड के प्रबंधक वर्ग और प्रदेश सरकार से इन पीड़ित परिवारों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए उचित मुआवजा और उचित समय पर नौकरी मुहैया करवाने की मांग की है। अगर इन मामलों के समाधान की दिशा में उचित कार्रवाई नहीं की जाती है तो यूनियन इन परिजनों के साथ मिलकर आंदोलन से गुरेज नहीं करेगी।
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