नादौन (हमीरपुर)। बिजली बोर्ड में तकनीकी और आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बोर्ड कोई कदम नहीं उठा रहा है। लगातार कर्मचारियों के साथ काम करते वक्त हादसे हो रहे हैं। इनसे सबक लेकर सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाने पर हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने कड़ा रोष व्यक्त किया है। नादौन में पत्रकारों से बात करते हुए यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि बोर्ड की सुस्ती के कारण ऐसी दुर्घटनाओं की दर में लगातार वृद्धि होती जा रही है और विभिन्न दुर्घटनाओं में कई कर्मचारी अपनी जान गंवा रहे हैं। जबकि कई शारीरिक तौर पर सदा के लिए अपाहिज हो रहे हैं। आरोप लगाया कि ऐसी दुर्घटनाओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बजाय लीपापोती कर मामलों को दबाने के प्रयास हो रहे हैं। जिसकी वजह से दुर्घटनाएं कम होने की बजाए बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि गत 11 अक्तूबर को ट्रांसमिशन डिविजन मंडी के अंतर्गत शेर सिंह सहायक लाइनमैन दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। जिसके पीजीआई चंडीगढ़ में दोनों बाजू कट चुके हैं और टांगों में भी घाव हैं। अभी हाल ही में 16 नवंबर को बिजली मंडल ऊना के अधीन संतोषगढ़ उपमंडल में निर्मल सिंह आउटसोर्स कर्मचारी 11 केवी लाइन पर करंट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसका भी पीजीआई चंडीगढ़ में एक बाजू कट चुका है और दूसरे बाजू की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है। इसके अलावा कई अन्य हादसे हुए हैं। उन्होंने पूछा है कि ऐसे हादसों के लिए कौन जिम्मेवार हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों को जहां इलाज करवाने के लिए कोई सुविधा नहीं है वहीं उनके मरने के बाद भी उनके परिजनों को न तो कोई मुआवजा राशि दी जा रही है न ही निजी सर्विस प्रदाताओं की ओर से ईपीएफ तक का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिजली बोर्ड के प्रबंधक वर्ग ने 15 नवंबर 2019 को यूनियन के साथ हुई बैठक में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बोर्ड के कर्मचारियों की तरह दस लाख की राहत राशि परिजनों को जारी करने के बात मानी थी। जिसकी अधिसूचना अतिशीघ्र जारी करने की जरूरत है। यूनियन ने प्रबंधक वर्ग से बिना किसी देरी के ठोस कदम उठाने की मांग की है। संघ ने मांग की है कि इन सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी नीति बनाकर बोर्ड के अधीन लाया जाए।