नादौन (हमीरपुर)। बिजली बोर्ड कर्मचारी, इंजीनियर और पेंशनरों की संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक गगाल में हुई। बैठक में बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष नितिश भारद्वाज, बिजली बोर्ड पेंशनर फोरम के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा विशेष रूप से मौजूद रहे।
बैठक में केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक-2025 का विरोध किया गया। कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने बताया कि यह संशोधन विधेयक बिजली वितरण क्षेत्र के निजीकरण का एक रोडमैप है। स्मार्ट मीटर को आम बिजली उपभोक्ताओं पर थोपना गलत है। वर्षों की मेहनत व लागत से तैयार किए गए ढांचे को थाली में परोसकर लूट का लाइसेंस देने की बात केंद्र सरकार कर रही है।
अगर हिमाचल के संदर्भ में देखा जाए तो बिजली बोर्ड लिमिटेड का लगभग 65 प्रतिशत राजस्व बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों से आता है। इस पर प्राइवेट कॉरपोरेट का कब्जा होने से शेष 35 प्रतिशत राजस्व के साथ इतने बड़े आधारभूत ढांचे का रख-रखाव करना संभव नहीं है।
बिजली संशोधन विधेयक 2025 बिजली की दरों में वृद्धि करेगा। अधिकार छीन लेगा और राज्यों को कमजोर करेगा। ग्रिड को अस्थिर करेगा, नौकरियों को समाप्त करेगा और सार्वजनिक क्षेत्र को नष्ट कर देगा।
बैठक में सार्वजनिक बिजली क्षेत्र की रक्षा करने के लिए बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति द्वारा 12 फरवरी को किए गए हड़ताल के आह्वान को सफल बनाने पर चर्चा की गई। बैठक में राकेश चौधरी, अजनीश, रजत, आशीष शर्मा आदि मौजूद रहे।