हमीरपुर। हमीरपुर शहर में अधिकतर भवनों में डाउन पाइप न होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कायदे से डाउन पाइप के जरिये भवन का पानी निकासी नालियों में डाला जाना चाहिए, लेकिन शहर में इसे लेकर बड़ी कोताही बरती जा रही है।
हालात ऐसे हैं कि नगर निगम और प्रशासन इस अहम मसले को महज नोटिस की औपचारिकता के दौर से निपटा रहा है। हमीरपुर नगर परिषद से नगर निगम बन चुका है, लेकिन करीब एक दशक से किसी एक भी गृह मालिक के खिलाफ जुर्माना नहीं लगाया है। डाउन पाइप न लगाने पर निगम की ओर से जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन अब तो सिस्टम इससे बचता ही रहा है।
घरों और कमर्शियल भवनों में डाउन पाइप को लेकर नगर निगम कार्रवाई के दावे करता रहा है, लेकिन यह दावे फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाते हैं। पिछले करीब एक दशक से नियमों की अनदेखी करने वाले दुकानदारों और गृह मालिकों के खिलाफ कार्रवाई न होना ही नगर निगम की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है।
नगर निगम हमीरपुर के तहत 15 वार्ड हैं, जिनमें नगर निगम बनने के बाद चार नए वार्ड बने हैं। मगर पुराने 11 वार्डों में हालात बहुत ही दयनीय हैं। पानी की निकासी के लिए डाउन पाइप न होने के कारण यह पानी सीधा सड़कों पर गिरता है। नगर निगम के तहत भवनों में छतों से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए डाउन पाइप डालना अनिवार्य है।
अगर कोई दुकानदार या भवन मालिक ऐसा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ निगम की ओर से नोटिस भेजा जाता है तथा उसके बाद जुर्माना वसूल किया जाता है। मगर निगम के अधिकारी कार्रवाई करने के नाम पर केवल दावे करते रहे हैं। पिछले एक वर्ष में नगर निगम ने एक भी ऐसे भवन मालिक से जुर्माना वसूल नहीं किया है, जिसमें उन्होंने डाउन पाइप न डाली हो।
कोट
नियमों के अनुसार नियमों का पालन न करने पर पहले नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बाद जुर्माना वसूल किया जाता है। नगर निगम जल्द ही ऐसे भवन मालिकों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी करेगा तथा इसके बाद समस्या का हल नहीं होता है तो जुर्माना वसूल किया जाएगा।
-राम प्रसाद, अतिरिकत आयुक्त, नगर निगम हमीरपुर
नगर निगम हमीरपुर के तहत सड़क पर छतों का पानी गिरने के कारण बने गड्ढे। संवाद