साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 78 वर्षीय सेवानिवृत्त सूबेदार को करीब 70 लाख रुपये की ठगी के जाल में फंसाने की कोशिश की। ठग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग को लगातार व्हाट्सऐप कॉल कर रहे थे और रकम नहीं भेजने पर गिरफ्तारी की धमकी दे रहे थे। हालांकि, पंजाब नेशनल बैंक की भूंपल शाखा के अधिकारियों की सतर्कता से बड़ी ठगी होने से बच गई।
शाखा प्रबंधक अंकिता संदल, उपप्रबंधक मीनाक्षी शर्मा और संजय सूद के अनुसार, 25 अगस्त को ग्राहक ने दूसरे बैंक खाते से पीएनबी खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर करने के संबंध में जानकारी ली थी। इसके बाद 29 अगस्त को उन्होंने 55 लाख रुपये शाखा के खाते में जमा करवाए। खाते में पहले से मौजूद राशि मिलाकर ग्राहक ने पूरी रकम आईसीआईसीआई बैंक के खाते में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया।
बड़ी रकम एक साथ दूसरे खाते में भेजने के अनुरोध पर बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ। उन्होंने ग्राहक के बेटे से संपर्क कर मामले की जानकारी ली। 31 अगस्त को जब ग्राहक दोबारा शाखा पहुंचा तो बैंक अधिकारियों ने रकम ट्रांसफर करने का कारण पूछा।
पूछताछ में बुजुर्ग ने बताया कि 19 अगस्त से उन्हें व्हाट्सऐप पर लगातार कॉल आ रही थीं। कॉल करने वाले ने पुलिस अधिकारी की तस्वीर और नाम का इस्तेमाल करते हुए खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग को धमकाया कि यदि बताए गए खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं किए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बैंक अधिकारियों ने बातचीत के आधार पर समझ लिया कि मामला साइबर ठगी से जुड़ा है। उन्होंने बुजुर्ग को बताया कि कोई भी पुलिस अधिकारी इस तरह व्हाट्सऐप कॉल के जरिये पैसे ट्रांसफर करने या गिरफ्तारी का डर दिखाकर दबाव नहीं बनाता। बैंक अधिकारियों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर चल रहे साइबर ठगी के तरीके के बारे में भी समझाया।
सच्चाई सामने आने के बाद बुजुर्ग ने रकम दूसरे खाते में भेजने का फैसला बदल दिया। उन्होंने करीब 70 लाख रुपये की राशि को एफडी में सुरक्षित करवा दिया। इस तरह बैंक अधिकारियों की सतर्कता से सेवानिवृत्त सूबेदार साइबर ठगों के हाथों अपनी जीवनभर की बड़ी रकम गंवाने से बच गए।
पुलिस ने कहा- डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कार्रवाई नहीं
एसपी हमीरपुर बलवीर ठाकुर ने लोगों को साइबर ठगी के ऐसे मामलों में सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का नाम लेकर वीडियो या व्हाट्सऐप कॉल पर डराए और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाए तो घबराने के बजाय तुरंत पुलिस और बैंक को सूचना दें।