हमीरपुर। जिला के पांच अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा देने की कवायद तेज हो गई है। अस्पतालों की ओर से प्राप्त संभाव्यता (फिजिबिलिटी) रिपोर्ट को शिमला में स्वास्थ्य विभाग को भेजा गया। योजना के सिरे चढ़ने पर मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।
सुजानपुर, भोरंज, बड़सर, नादौन और टौणी देवी अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा देने के लिए इन अस्पतालों से संभाव्यता रिपोर्ट मांगी गई थी। अभी जिला हमीरपुर में मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ तीन निजी स्वास्थ्य संस्थानों में डायलिसिस की सुविधा है। इसके चलते मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में डायलिसिस के लिए अधिक भीड़ होती है।
वहीं, भीड़ के चलते कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। निजी अस्पतालों में मरीजों को अधिक फीस चुकानी पड़ती है। कई बार मरीजों को जिला के बाहर भी डायलिसिस के लिए जाना पड़ता है। सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि पांच अस्पतालों में जल्द ही डायलिसिस सुविधा आरंभ होगी। संभाव्यता रिपोर्ट को आगामी कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग शिमला प्रेषित किया गया है।
यह है डायलिसिस
डायलिसिस रक्त शोधन की एक कृत्रिम विधि होती है। इस डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है, जब किसी व्यक्ति के गुर्दे सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। यदि डायलिसिस रोगी के गुर्दे बदलकर नए गुर्दे लगाने हों, तो डायलिसिस की प्रक्रिया अस्थाई होती है। यदि रोगी के गुर्दे इस स्थिति में न हों कि उसे प्रत्यारोपित किया जाए, तो डायलिसिस अस्थायी होती है, जिसे आवधिक किया जाता है।