हमीरपुर। जब देश अभी आजादी के सपने बुन रहा था, उस दौर में वर्ष 1934 में हमीरपुर जिले के धनेटा में एक स्कूल की नींव रखी गई। अंग्रेजों के शासनकाल में खुला यह विद्यालय 92 वर्षों बाद भी शिक्षा की लौ जलाए हुए है।
वर्ष 1933 में एक गांव के व्यक्ति ने पांच कनाल 14 मरले भूमि इस स्कूल के निर्माण के लिए दान में दी। सिर्फ इस उम्मीद के साथ कि क्षेत्र की बेटियां शिक्षा की रोशनी पा सकें। पहले 20 वर्षों तक यह विद्यालय सह-शिक्षा के रूप में चला, जहां छात्र और छात्राएं एक साथ पढ़ते थे। फिर वर्ष 1954 में इसे पूर्ण रूप से कन्या विद्यालय का दर्जा दिया गया और तब से पिछले 72 वर्षों से यह केवल बेटियों की शिक्षा को समर्पित है।
जिला का पहला कन्या विद्यालय होने का गौरव भी इसी स्कूल को प्राप्त है। लोगों की मांग पर 25 जून 1999 में स्कूल का दर्जा बढ़ाकर इसे उच्च कर दिया गया। इस विद्यालय में पढ़कर कईं छात्राओं ने क्षेत्र और जिला का नाम चमकाया है। कई छात्राएं शिक्षक, डाॅक्टर और प्रशासनिक अधिकारी और सेना में अफसर बन चुकी हैं। बोर्ड की मेरिट में स्कूल की छात्राओं ने कई दफा अपना नाम दर्ज करवाया है।
कैप्टन ईशा ठाकुर सेना में सेवाओं के बाद अब एचएएस अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। वह इस स्कूल में पढ़ीं और उनके जैसी दर्जनों छात्राएं हैं। वर्ष 1934 में अंग्रेजों के राज में खुला कन्या विद्यालय धनेटा आजादी से पहले की यादों को खुद में संजोए हुए है, ऐसे में इसे मर्ज करने के निर्णय का विरोध शुरू हो गया है।
क्षेत्रवासियों ने इस फैसले का कड़ा ऐतराज जताया है। विद्यालय में क्षेत्र की कई नामी हस्तियों के साथ महिला अधिकारी पढ़ाई कर चुकी हैं। अभिभावकों का कहना है कि कन्या विद्यालय में दाखिला करवाकर वे अपनी बेटियों को सुरक्षित महसूस करते हैं। अब उन्हें बेटियों को सह शिक्षा वाले स्कूल में भेजना असहज लगेगा।
कोट्स
कन्या स्कूल में छात्राओं को पढ़ाने में अभिभावक सुरक्षा महसूस करते हैं, लेकिन अब स्कूल के विलय से सभी की चिंताएं बढ़ गई हैं।
-उर्मिला, पूर्व छात्रा
ग्रामीणों ने कई प्रयासों के बाद स्कूल का निर्माण करवाया है, ताकि छात्राओं को मुख्यालय में ही पढ़ाई की सुविधा मिल सके। स्कूल के विलय पर पुनर्विचार हो।
-सूरम सिंह, पूर्व छात्र
स्कूल के मर्ज होने से वर्षों पुराना अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। स्कूल में कईं अधिकारी महिलाएं पढ़ाई कर चुकी हैं। स्कूल बंद होने पर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
-देवराज पूर्व छात्र
एक-एक करके सरकारी स्कूलों को समाप्त किया जा रहा है। स्कूल में छात्राओं की संख्या भी पर्याप्त है, लेकिन फिर भी स्कूल को बंद किया जा रहा है।
-सोनिया ठाकुर, प्रधान एसएमसी
यह पूर्व छात्राएं स्कूल में कर चुकी हैं पढ़ाई
-कैप्टन ईशा ठाकुर, पूर्व सेना अधिकारी, वर्तमान में एचएएस अधिकारी के रूप में कार्यरत। उत्तीर्ण वर्ष : 1990।
-डॉ. पूनम बीडीएस, एमडीएस, विभागाध्यक्ष, डीएवी डेंटल कॉलेज, सोलन। उत्तीर्ण वर्ष: 1993।
-डॉ. स्वाति एमबीबीएस,
एमडी (एआईआईएमएस), फीनिक्स डायग्नोस्टिक सेंटर, बिलासपुर। उत्तीर्ण वर्ष: 1997।
कन्या स्कूल धनेटा का गेट।
कन्या स्कूल धनेटा का गेट।
कन्या स्कूल धनेटा का गेट।
कन्या स्कूल धनेटा का गेट।