धौलासिद्ध प्रोजेक्ट में विरोध प्रदर्शन करते मजदूर। स्रोत: संघ
हमीरपुर। सीटू ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और सयुंक्त किसान मोर्चा के सयुंक्त आह्वान पर मंगलवार को निर्माणाधीन जल बिजली परियोजना धौलासिद्ध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर ने कहा कि कोरोना के समय में मोदी सरकार ने देश में लॉकडाउन लगाकर मजदूरों के लिए बने बने 44 श्रम कानूनों को खत्म करके चार नए लेबर कोड बना दिए हैं। साथ ही तीन कृषि कानून बनाकर देश की संपूर्ण कृषि को कॉर्पोरेट के हवाले करने के मकसद से यह कानून बनाए, जिनका देश के मजदूरों और किसानों ने डटकर विरोध किया।
उन्होंने कहा कि 26 नवंबर को ही दिल्ली में ऐतिहासिक किसान आंदोलन शुरू हुआ और देश भर के किसानों और मजदूरों ने इस आंदोलन में जबरदस्त हिस्सेदारी की और 800 किसानों की शहादत के बाद मोदी सरकार को झुकना पड़ा और तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना पड़ा, परंतु मोदी सरकार ने मजदूरों के लिए बनाए चार लेबर कोड को समाप्त नहीं किया है और उन्हें तीसरी बार सत्ता संभालने के बाद 100 दिन के भीतर लागू करने की योजना बनाई है। इसका देश के मजदूर विरोध कर रहे हैं और आज का प्रदर्शन इन चार लेबर कोड को निरस्त करने के लिए किया गया।
देश में बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी विकराल रूप ले चुकी है। युवाओं में आत्महत्या की दर लगातार बढ़ रही है। देश की लगभग आधी आबादी भरपेट खाने से वंचित हो रही है। देश की जनता पर भारी भरकम टैक्स लगाने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं नहीं मिल रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार सरकार के एजेंडे में ही नहीं हैं। मजदूरों को अपने जीवन के मसलों को राजनीति के केंद्र में लाना होगा, इसके लिए विरोध तेज करने का आह्वान किया। प्रदर्शन में सीटू के जिला सचिव जोगिंद्र कुमार, रंजन शर्मा, धौलासिद्ध इकाई के अध्यक्ष नवीन कुमार और इकाई सचिव संतोष कुमार सहित सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया।