हमीरपुर। पंचायत समिति हमीरपुर के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का फैसला सोमवार को होगा। 17 वार्ड वाली पंचायत समिति में अध्यक्ष पद अनारक्षित है। दोनों पदों पर कब्जे को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने बहुमत का दावा किया है।
ऐसे में चुनावी बैठक में सदस्यों की मौजूदगी और मतदान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। जिला मुख्यालय की पंचायत समिति के चुनाव परिणाम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस की पकड़ की अहम परीक्षा माना जा रहा है।
जिले की छह पंचायत समितियों में भोरंज और सुजानपुर में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव हो चुके हैं। भोरंज में कांग्रेस, जबकि सुजानपुर में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने दोनों पदों पर जीत दर्ज की है।
नादौन, बमसन और बिझड़ी पंचायत समितियों के चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में अब राजनीतिक दलों की नजरें पंचायत समिति हमीरपुर पर टिकी हैं। दोनों दल अपने-अपने पक्ष में सदस्यों के आंकड़े बता रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदान के बाद ही सामने आएगा।
दो कांग्रेस नेताओं की भी होगी परीक्षा
हमीरपुर सदर की पंचायत समिति का चुनाव कांग्रेस के दो प्रमुख स्थानीय नेताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व में दो बार कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ग्रामीण क्षेत्र में सक्रिय हैं। पंचायत समिति के चुनाव में प्रदर्शन से दोनों नेताओं की संगठनात्मक पकड़ और जनाधार का भी आकलन होगा। वहीं भाजपा के स्थानीय विधायक आशीष शर्मा के लिए भी यह चुनाव ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन और समर्थकों की पकड़ परखने का मौका है। 17 वार्डों वाली समिति में अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के कारण मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
गांव की सरकार में सियासी स्कोर बराबर करने की कोशिश
भोरंज में कांग्रेस और सुजानपुर में भाजपा की जीत के बाद दोनों दलों का जिला स्तर पर सियासी स्कोर फिलहाल बराबरी पर है। हमीरपुर पंचायत समिति में जीत दर्ज कर भाजपा बढ़त बनाने और कांग्रेस सुजानपुर की हार का जवाब देने की कोशिश करेगी। इसके बाद बमसन और अन्य पंचायत समितियों के चुनाव पर भी निगाहें रहेंगी। ऐसे में सोमवार का परिणाम केवल एक पंचायत समिति की कुर्सी का फैसला नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले हमीरपुर की ग्रामीण राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत भी दे सकता है।