अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के बाद अब हमीरपुर डीसी ऑफिस कर्मचारी महासंघ भी दोफाड़ हो गया। पहले गुट के प्रधान संजीव प्रभाकर हैं जबकि दूसरे के विकास कौंडल।
24 जुलाई 2015 को हुए चुनाव में संजीव प्रभाकर को हमीरपुर उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी महासंघ का प्रधान चुना गया। बुधवार को उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी महासंघ के दूसरे गुट ने विकास कौंडल को निर्विरोध प्रधान चुना।
इससे पहले अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के भी हमीरपुर में समानांतर दो गुट चल रहे हैं। एनजीओ के पहले गुट के प्रधान मान चंद राणा हैं तो दूसरे गुट के प्रधान जितेंद्र राणा हैं।
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ भवन पर कब्जे को लेकर भी एनजीओ के इन दोनों गुटों में लंबे समय से तकरार चल रही है। इसी बीच बुधवार को उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी महासंघ भी दोफाड़ हो गया।
हैरानी की बात है कि करीब 120 कर्मचारियों वाले उपायुक्त कार्यालय में सभी अपने-अपने वजूद की जंग लड़ रहे हैं। लेकिन इसमें नुकसान कर्मचारियों को माना जा रहा है।
विधानसभा चुनावों से पहले कर्मचारी गुटों में बंटवारे से मुद्दे गौण होते दिख रहे हैं। वहीं कर्मचारियों को अपनी बात रखने का सही मंच भी नहीं मिल रहा।
मुझे उपायुक्त कार्यालय कर्मचारियों का साथ है। महासंघ का प्रधान चुनकर जो जिम्मेवारी दी गई है उसे निभा रहा हूं। महासंघ में उपायुक्त कार्यालय के अलावा जिले की 9 तहसीलों और 5 उपमंडल कार्यालय का मिनिस्ट्रीयल स्टाफ शामिल है जबकि दूसरे गुट में ऐसा नहीं है।
- संजीव प्रभाकर, प्रधान, उपायुक्त कार्यालय, कर्मचारी महासंघ
मुझे निर्विरोध रूप से उपायुक्त कार्यालय का प्रधान चुना है। सभी कर्मचारियों की समस्याओं और ज्वलंत मुद्दों को सरकार एवं विभाग के उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाकर उनका समाधान करवाएंगे।
- विकास कौंडल, प्रधान, उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी महासंघ