नादौन (हमीरपुर)। उपमंडल नादौन के गांव बलडूहक में एक महिला की अचानक मौत हो गई। इसकी सूचना मिलने पर नवांशहर में रहने वाली उसकी बेटी और दामाद ने बलडूहक में अंतिम संस्कार में जाने का फैसला लिया। लेकिन, लॉकडाउन और कर्फ्यू जैसी चीजें उनके आड़े आ रही थीं। ऐसे में बेटी ने बिना समय गंवाए अपने पति के साथ बलडूहक स्थित अपने मायके जाने का निर्णय किया। बेटी गाड़ी में अपने पति के साथ नवांशहर से निकली। लेकिन, मसेह खड्ड पर पुलिस ने दोनों को रोक लिया और आगे गाड़ी ले जाने की अनुमति नहीं दी। बेटी प्रशासन के आगे रोती रही, बिलखती रही मगर दुखियारी बेटी के सामने प्रशासन कानून का हवाला देता रहा। पुलिस ने एक शर्त पर जाने की अनुमति दी और वह थी पैदल जाने की। बेटी ने मां के अंतिम दर्शन के लिए पैदल जाना ही उचित समझा और दोनों दंपती मसेह खड्ड से बलडूहक के लिए पैदल ही चल पड़े। सवाल अनेक हैं. परंतु जवाब एक ही है कि मां की ममता के आगे प्रशासन के नियम कानून बौने साबित हुए। बेटी ने करीब 22 किलोमीटर का सफर अपनी मां के अंतिम दर्शन के लिए पैदल ही तय किया जो आज के युग के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। एसएचओ प्रवीण राणा का कहना है कि इनके पास कर्फ्यू पास तो था लेकिन लोकल प्रशासन की अनुमति न होने के चलते वाहन को अनुमति देना संभव नहीं था।