रंगस (हमीरपुर)। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी आम के अंकुर पर सफेद चूरणीय रोग या फिर मैंगो हॉपर के अटैक का खतरा है। पिछले वर्ष मौसम के प्रतिकूल होने की वजह से आम के पौधों पर आने वाले बौर को पाउडरी मिल्ड्यू यानि सफेद चूरणीय रोग ने काफी क्षति पहुंचाई थी। इससे अंकुर के फूटने के बाद उसका रंग एकदम काला पड़ गया था। इससे मैंगो का ऑन ईयर यानि अधिकतर पैदावार होने वाले वर्ष में आम की पैदावार में भारी गिरावट आई थी।
इस बार भी बारिश के देरी से होने और अचानक तापमान के बढ़ने से ऐसी संभावनाएं बनी हुई हैं। फल विज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी सफेद चूरणीय रोग या फिर मैंगो हॉपर जैसे कीट का अटैक हो सकता है। इससे बचने के लिए बगीचे को साफ सुथरा रखना बहुत ही जरूरी है और उसमें सूर्य की रोशनी का प्रवेश भी अति आवश्यक है।
आम के अंकुर पर मैंगो हॉपर कीट का अटैक होने की स्थिति में कई बार उसकी टहनियां सूखने और पत्ते झुलसने लगते हैं। उसके बाद अंकुर भी काला होकर झड़ने लगता है। कई बार हॉपर कीट फल लगने पर भी अटैक करता है। इससे फल सड़ने शुरू हो जाते हैं। महाविद्यालय में कीट विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं विशेषज्ञ डॉ. वरिंद्र राणा ने कहा कि अभी फिलहाल अभी मैंगो हॉपर का अटैक नहीं दिखा है। हालांकि आने दिन वाले दिनों में इसका अटैक हो सकता है।
ऐसे करें बचाव, इस दवाई का करें छिड़काव
उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी के फल विज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. शशि ने कहा कि आम पर अभी अंकुर आने के समय यदि सफेद चूरणीय रोग के लक्षण दिखें तो इसके लिए मिल्ड्यू के आधार पर कम से कम 15 दिन के अंतराल में तीन बार फंगीसाइड का छिड़काव करना जरूरी है। सबसे पहले घुलनशील सल्फर दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर आम के अंकुर पर स्प्रे करनी चाहिए। फिर भी यदि लगे कि इसके ऊपर और छिड़काव करना जरूरी है तो 10 से 15 दिन के बाद डेमोकैप नामक दवाई एक एमएल प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोलकर छिड़के। इसके बाद भी रोग नियंत्रित न हो तो ट्राइडमोर्फ का एक एमएल प्रति लीटर के हिसाब से घोलकर छिड़कें। सभी दवाइयां का छिड़काव 50 फीसदी अंकुर आने के बाद नहीं करना चाहिए।