जिला एवं सत्र न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी चालक को सात साल कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना की राशि अदा न करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त कारावास होगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रत्न सिंह ठाकुर की अदालत ने सजा सुनाई है।
जिला न्यायवादी अशोक धीमान ने बताया कि 13 जुलाई 2014 को नाबालिग की मां ने पुलिस थाना भोरंज में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसकी बेटी सरकारी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ती है। इसी गांव का हेमराज निजी वाहन में प्राइवेट स्कूल के बच्चों को छोड़ने जाता था। हेमराज उसकी बेटी को भी स्कूल छोड़ता था।
स्कूल से पहले ही हेमराज उसकी बेटी को गाड़ी में बिठाकर जंगल में सुनसान जगह पर हवस का शिकार बनाता था। नाबालिग की मां को हेमराज पर शक हुआ तो उसने अपनी बेटी से पूछताछ की। इस पर बेटी ने मां को सारी बात बताई। नाबालिग ने बताया कि हेमराज ने किसी को भी यह बात बताने पर उसे दराट से काटने की धमकी दी थी।
मां की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। मामला न्यायालय में पहुंचा। सोमवार को न्यायालय ने हेमराज को दोषी करार देते हुए पोक्सो एक्ट के तहत सात साल के कठोर कारावास, 20 हजार रुपये जुर्माने और धारा 506(2) के तहत एक साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा होगी। जुर्माना राशि नाबालिग के पिता को बतौर राहत देने के आदेश दिए गए हैं।
मामले की छानबीन एएसआई स्वर्णरूप सिंह ने की। मामले की पैरवी जिला न्यायवादी अशोक कुमार धीमान ने की है। सरकार ने मामले में कुल 23 गवाह पेश किए।