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मेडिकल कॉलेज में गर्भवती महिला की मौत

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- फोटो : amar ujala
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हमीरपुर। डॉ. राधा कृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में बुधवार देर शाम को एक गर्भवती महिला और उसके पेट में पल रहे करीब छह माह के नवजात की गर्भ मेें ही मौत हो गई। मृतक महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए खूब हंगामा किया। मामला बिगड़ती देख पुलिस थाना हमीरपुर से टीम अस्पताल में पहुंची। लेकिन, परिजनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इसके बाद एडिशनल एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने खुद मौके पर पहुंच कर मामले को सुलझाने का काफी देर तक प्रयास किया। एएसपी ने परिजनों को आश्वासन दिलवाया कि पुलिस अपनी तरफ से निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करेगी। जिसके बाद परिजनों का गुस्सा शांत हुआ।
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महिला की पहचान 24 वर्षीय वंदना कुमारी निवासी बड़ा, उपमंडल नादौन जिला हमीरपुर के रूप में हुई है। करीब चार साल पहले उसकी शादी हुई थी। वंदना की एक दो साल की बेटी है। जबकि पति भारतीय सेना में सेवारत हैं। प्रसव पीड़ा के कारण मंगलवार को गर्भवती को हमीरपुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इस मौके पर वंदना के मायके से माता-पिता और ससुराल से सास भी अस्पताल में ही मौजूद थीं। महिला के पिता दीप कुमार का आरोप है कि उचित देखभाल न होने और अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही के चलते उनकी बेटी की मौत हुई है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उधर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हमीरपुर बलवीर सिंह ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं अस्पताल के एमएस डॉ. अनिल सूद का कहना है कि गायनी विभाग के अध्यक्ष से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है।
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अस्पताल में चल रही थी डिनर पार्टी-
मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बुधवार को जब गर्भवती की मौत हुई, उस दौरान अस्पताल का सारा स्टाफ डिनर पार्टी में था। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की तरफ से डॉ. एस राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर रात्रि भोज का प्रबंध किया गया था। हैरानी की बात है कि गर्भवती महिला की मौत होने जाने और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत पुलिस फोर्स के अस्पताल में पहुंचने पर भी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बड़े अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। इमरजेंसी वार्ड में केवल एक चिकित्सक और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ ही मौजूद था। बता दें कि दो हफ्ते पहले ही एक 9 माह की गर्भवती महिला को भी सही उपचार न मिलने के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी है। परिजनों ने इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन, जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से की हुई है। लोगों का आरोप है कि अस्पताल का केवल दर्जा बढ़ाया गया है लेकिन, मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं शून्य हैं।
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