हिमाचल अनुबंध अध्यापक संघ की वार्षिक बैठक प्रदेशाध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया की अध्यक्षता में भोटा विश्राम गृह में हुई। इसमें प्रदेश भर से आए पदाधिकारियों, अनुबंध शिक्षकों एवं अनुबंध से नियमित शिक्षकों ने भाग लिया।
बैठक में अनुबंध कर्मियों के मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में सभी सदस्यों ने एकमत प्रस्ताव पारित कर सरकार से हाल ही में नियमित शिक्षकों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग की।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया, महासचिव राजेश वर्मा, वित्त सचिव कपिल डोगरा, ऊना से संजीव बग्गा, हमीरपुर से कमल चौहान, सुरेंद्र शर्मा, रणजीत चंदेल, पूजा चंदेल, मनदीप, दिनेश कुमार, मनोज कुमार और विनोद कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि जब एक अनुबंध कर्मी नियमित होता है तो उसके वेतन निर्धारण में भी शोषण होता है।
जहां नियमितीकरण से पहले एक शिक्षक लगभग 18 हजार वेतन लेता है, नियमितीकरण होने पर उसे 14 हजार की बेसिक पर फिक्स कर दिया जाता है। वहां भी इन शिक्षकों को नियमित होने पर शुरुआती (इनिशियल) वेतन नहीं दिया गया।
यह समझ से परे है कि सरकार जो वेतन आपको देती है नियमितीकरण पर उसे आपसे छीन लेती है। अनुबंध काल की सारी वेतन बढ़ोतरी वापस ले ली जाती है जो सरासर अन्याय है।
इससे अनुबंध कर्मी को न तो अनुबंध काल का वित्तीय लाभ मिलता है और न ही नियमित सेवा काल में जोड़ा जाता है। बैठक में सभी सदस्यों ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की उस घोषणा को प्रदेश सरकार से अमलीजामा पहनाने की मांग की जिसमें उन्होंने भविष्य में अनुबंध प्रथा को बंद करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री के इस निर्णय को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। प्रदेश के सभी अनुबंध कर्मियों को एकमुश्त नियमित करने की मांग की है। बैठक में अजय ठाकुर, संदीप अहितान, नरेश भारद्वाज, कमल चौहान आदि ने कहा कि कुछ लोग अनुबंध अध्यापक संघ के नाम पर कर्मियों को बांट रहे हैं।
ये न तो अनुबंध शिक्षकों के हितैषी हैं, न ही अनुबंध कर्मियों के। संघ प्रदेश के सभी अनुबंध एवं अनुबंध से नियमित शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों से अपील की है कि अनुबंध प्रथा खत्म करने में संघ का साथ दें।