दिस अड्डा हमीरपुर पर बसों का इंतजार करते लोग।
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हमीरपुर। बस किराया बढ़ने की अधिसूचना जारी होने के बाद जहां वीरवार से निजी बस रूटों के बढ़ने की उम्मीद थी, वहीं इसके विपरीत जिले के 15 रूट बंद कर दिए गए। कारण साफ है निजी बसों को यात्रियों का न मिलना। तीन दिन से निजी बस आपरेटर जिला में बसें दौड़ा रहे हैं, लेकिन उन्हें नाममात्र की ही सवारियां मिल रही है। इस कारण उनका तेल खर्चा भी पूरा नहीं हो पा रहा है। किराया बढ़ने से गुस्साए लोग निजी बसों में सफर करने से भी परहेज कर रहे हैं। अधिकतर लोग हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में यात्रा को तरजीह दे रहे हैं।
इस कारण निगम की बसों में निजी बसों से अधिक सवारियां दिख रही हैं। निजी बस आपरेटर्स तो अधिकतर रूटों पर पांच सात सवारियों को लेकर ही रवाना हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें तेल खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। जबकि इसके अलावा चालकों-परिचालकों का वेतन और बस रखरखाव व मरम्मत पर भी खर्च आएगा। एक दिन रूटों पर चलने पर सवारियां न मिलने के कारण 15 बस आपरेटरों ने बसें बंद करद दीं।
निजी बस आपरेटर्स संघ हमीरपुर के उपाध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि वीरवार को 70 रूटों पर बसें जा रही थी। घाटे के चलते 15 बसों के रूट थम गए हैं। उन्होंने खुद छह बसें चलाईं है। तीन दिन में इन छह बसों में महज 14 हजार रुपये सेल हुई है। जो तेल खर्च को भी पूरा नहीं करती है। उन्होंने कहा कि सरकार बस आपरेटरों का टैक्स 31 मार्च 2021 तक माफ करे। शुक्रवार को अधिकतर बसों की सीटें खाली रहीं। बसें पांच से सात यात्रियों को लेकर अपने रूट पर निकली। जिससे खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।