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शुद्ध पेयजल के दावे खोखले, बड़सर में समय पर नहीं हो रही टैंकों की सफाई

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बड़नी गांव में टैंक की उचित सफाई न होने से हरा हुआ टैंक के भीतर का रंग। - फोटो : Hamirpur-HP
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बड़सर (हमीरपुर)। लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के जल शक्ति विभाग के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बड़सर क्षेत्र में कई पेयजल टैंकों की समय पर सफाई न होने से इनमें गंदगी पसरी हुई है। विभाग पेयजल टैंक की सफाई कर इस पर सफाई तिथि अंकित करता है, लेकिन बड़सर के कई टैंकों पर सफाई तिथि चार से पांच साल पुरानी ही लगाई गई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या हकीकत में टैंकों की सफाई हो रही है या महज कागजों में ही टैंक साफ हो रहे हैं। अगर टैंक समय-समय पर साफ हो रहे हों तो उनकी सफाई करने की तिथि भी विभाग को समय समय पर डालनी चाहिए।
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साफ पानी शुरू से मानव सभ्यता की एक आवश्यकता है और लोगों को साफ पानी मुहैया करवाना विभाग की जिम्मेदारी भी है, लेकिन लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से शुद्ध जल उपलब्ध करवाना विभाग के लिए चुनौती भी बना है। अमर उजाला की टीम ने शनिवार को जब बड़सर उपमंडल की कुछेक पानी के टैंकों का दौरा किया तो पाया कि इनकी सफाई उम्मीद अनुसार नहीं पाई गई। चंबेह गांव में एक बड़े टैंक से पानी मैहरे और आसपास के गांवों में पहुंचाया जाता है।
इसके साथ जुड़े अन्य छोटे टैंकों में पानी उतना साफ नहीं था जितना उसे होना चाहिए। विभाग जिस टैंक की सफाई करता है वहां टैंक साफ करने की तिथि लिखी जाती है, लेकिन यहां पाया गया कि अधिकतर पानी के टैंकों पर या तो तिथि लिखी ही नहीं गई है और जहां पर लिखी है, वहां कई साल पहले की तिथि लिखी हुई है, जोकि विभाग की कार्यप्रणाली पर अनेक सवाल भी खड़े करता है। इस बारे में जल शक्ति विभाग बड़सर के कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार ने कहा कि उन्होंने हाल ही में यहां ज्वाइन किया है। उन्हें अधिक जानकारी तो नहीं है, लेकिन हर तीन महीने में टैंकों की सफाई की जाती है। सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार ही सफाई की जाती है।
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