सीटू से संबंधित भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर यूनियन एवं अन्य यूनियनों के मजदूरों ने सोमवार को मजदूर दिवस पर जिला मुख्यालय में रैली और जनसभा की। इस रैली और जनसभा के माध्यम से मजदूरों ने केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के प्रति विरोध जताया।
सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने बीती 10 फरवरी को आदेश जारी किया है कि मनरेगा मजदूर अब निर्माण कामगार के सदस्य नहीं हैं। इस कारण लाखों मजदूरों को बोर्ड के तहत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की है कि मनरेगा मजदूरों को पहले की तरह 50 दिन कार्य करने पर मजदूर कल्याण बोर्ड का सदस्य बनाया जाए। सीटू जिला कमेटी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि 10 महीने पहले कल्याण बोर्ड के मजदूरों के बच्चों के लिए वजीफा, शादी के लिए लाभ एवं अन्य लाभों को बढ़ाने के फैसले को जल्दी लागू किया जाए।
जिला कमेटी ने मांग की है कि प्रदेश श्रमिक निर्माण कल्याण बोर्ड में श्रमिक अधिकारियों की नियुक्ति जल्दी की जाए। सीटू ने आरोप लगाया कि श्रम अधिकारी मनमाने तरीके से पंजीकरण कर रहे हैं और मजदूरों को मिलने वाले लाभों से वंचित कर रहे हैं।
सीटू जिला इकाई ने केंद्र एवं राज्य सरकार को चेताया है कि यदि मनरेगा और अन्य निर्माण मजदूरों का एक महीने के अंदर पंजीकरण नहीं किया तो प्रदेश की सभी मजदूर यूनियनें हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के कार्यालय शिमला का घेराव करेंगी।
इस मौके पर सीटू जिलाध्यक्ष प्रताप राणा, निर्माण मजदूरों की यूनियन के जिला सचिव रंजन शर्मा, अध्यक्ष धर्म सिंह, सीटू जिला संयुक्त सचिव सुरेश राठौर और अंजना वर्मा सहित सैकड़ों मजदूर उपस्थित रहे।