हमीरपुर। सीटू जिला कमेटी ने प्रदेश सरकार की ओर से काम के घंटों को आठ से बढ़ाकर बारह घंटे करने के निर्णय की कड़ी निंदा की है। सीटू ने इसे मजदूरों के अधिकारों पर कठोर प्रहार करने वाला कदम करार दिया है। सीटू ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि वह पूंजीपतियों व उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मजदूर विरोधी नीतियां बनाना बंद करे अन्यथा मजदूरों की ओर से जबरदस्त आंदोलन किए जाएंगे। सीटू जिला अध्यक्ष प्रताप राणा और जिला सचिव जोगिंदर कुमार ने कहा है कि प्रदेश सरकार की ओर से काम के घंटों को आठ से बारह करने के खिलाफ पूरे प्रदेश व जिला भर में सीटू के नेतृत्व में 14 मई को मजदूर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन करेंगे।
कोरोना महामारी व लॉकडाउन के दौर में मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित व पीड़ित हैं। ऐसे समय में प्रदेश की भाजपा सरकार का यह मजदूर विरोधी कदम पूरी तरह से मानवता विरोधी है। यह सरकार पूरी तरह से मजदूरों के खिलाफ कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार ने फैक्ट्री एक्ट 1948 की धारा 51, धारा 54, धारा 55 और धारा 56 में बदलाव करके साप्ताहिक व दैनिक काम के घंटों, विश्राम की अवधि व स्प्रैड ऑवर्स में बदलाव कर दिया है। काम के घंटों को आठ से बढ़ाकर बारह घंटे करने के मजदूर विरोधी कदम ने इस सरकार की पोल खोल कर रख दी है। इस निर्णय से फैक्ट्रियों में कार्यरत लगभग एक तिहाई मजदूरों की छंटनी होना तय है। अभी आठ घंटे की ड्यूटी के कारण फैक्ट्रियों में तीन शिफ्ट का कार्य होता है। बारह घंटे की ड्यूटी से कार्य करने की शिफ्टों की संख्या तीन से घटकर दो रह जाएगी। जिसके चलते तीसरी शिफ्ट में कार्य करने वाले एक-तिहाई मजदूरों की छंटनी हो जाएगी। वर्तमान में प्रदेश के ज्यादातर उद्योगों में न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 व वेतन भुगतान अधिनियम 1936 को पहले ही लागू नहीं किया जाता है। सरकार के इस कदम से मजदूरों का शोषण और तेज होगा।