मौसम के बदलते मिजाज के कारण जिला के बच्चे सर्दी-जुखाम की चपेट में आ रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में रोजाना एक से डेढ़ सौ बच्चे को लाया जा रहा है। चिकित्सकों की तर्क है कि दूषित पानी और बदलते मौसम के मिजाज के कारण बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
शून्य से सात साल तक के अधिकतर बच्चे सर्दी-जुखाम और उल्टी, दस्त की चपेट में आ रहे हैं। रोजाना क्षेत्रीय अस्पताल के शिशु वार्ड में एक से डेढ़ सौ शिशुओं की ओपीडी आ रही है। क्षेत्रीय अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी रोगी शिशुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। चिकित्सकों की मानें तो बदलते मौसम के कारण अधिकतर बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसके साथ ही दूषित पानी का सेवन भी उल्टी दस्त का मुख्य कारण है।
उधर, एमएस डा. अर्चना सोनी का कहना है कि मौसम के बदलते मिजाज और दूषित पानी के कारण बच्चे बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में रोजाना एक से डेढ़ सौ बच्चों की ओपीडी हो रही है।
बच्चों को बंद कमरे से अचानक खुले में न ले जाएं। बीमार होने पर बच्चों को हॉफ पेंट या शर्ट न पहनाएं। पानी उबालने के बाद ठंडा होने पर ही शिशु को पीने के लिए दें। पेयजल को हमेशा ढक कर रखे। घर में मक्खी, मच्छर न पनपने दें।
इसके लिए घर के आसपास निकासी नालियों की सफाई करें और इनमें पानी न रूकने दें। बच्चों में हल्की बुखार या उल्टी, दस्त की शिकायत होने पर उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चेक करवाएं।