प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई योजना के निर्माण के लिए बजट देने के लिए केंद्र ने हाथ खींच लिए हैं। 90:10 फीसदी अनुपात पर केंद्र व राज्य के आपसी सहयोग से उपमंडल नादौन में बनने वाली इस सिंचाई योजना का कार्य बजट के अभाव में लटक गया है।
156 करोड़ की लागत से बनने वाली मध्यम सिंचाई परियोजना का कार्य वर्ष 2011 में शुरू हुआ। तय शर्तों के मुताबिक इस परियोजना का कार्य मार्च, 2016 में पूरा होना था, लेकिन बजट ने इस सिंचाई प्रोजेक्ट की राह में रोड़े अटका दिए हैं।
केंद्र और राज्य सरकार के बीच लिखित समझौते के अनुसार निर्माण कार्य पर 90 फीसदी केंद्र सरकार जबकि 10 फीसदी खर्च राज्य सरकार ने वहन करना था। परियोजना के पूरा होने से नादौन की 2980 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचाई सुविधा मिलनी थी।
तय नियमों के अनुसार केंद्र सरकार से 90 फीसदी सब्सिडी हासिल करने के लिए पहले प्रदेश सरकार को परियोजना का 50 फीसदी कार्य अपने खर्च पर पूरा करना था। इस कारण राज्य सरकार ने आईपीएच विभाग को बजट जारी कर तेजी से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।
आईपीएच अब तक इस परियोजना पर 50 फीसदी से अधिक यानी 79 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन अब केंद्र से फंडिंग नहीं मिल रही। इस कारण उपमंडल के किसानों को मिलने वाली सिंचाई सुविधा नहीं मिल पा रही।
आईपीएच विभाग के अधीक्षण अभियंता एसके सोढी ने बताया कि 90:10 के अनुपात में बनने वाली मध्यम सिंचाई परियोजना पर राज्य सरकार 79 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन अब तक केंद्र सरकार से बजट नहीं मिला है। इस कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।