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आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम को निरस्त करे केंद्र सरकार: सीटू

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सीटू राष्ट्रीय महासचिव उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए। - फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। सीटू जिला कमेटी ने मोदी सरकार द्वारा देश के रक्षा उत्पादन में कार्यरत डिफेंस कारखानों के धड़ाधड़ निजीकरण के विरोध में डीसी हमीरपुर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा और सरकार के इस कदम का विरोध किया। सीटू जिला सचिव जोगिंद्र कुमार ने कहा कि देश की आंतरिक व बाहरी दोनों तरफ की सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह बेहद खतरनाक कदम है। इसके साथ ही इसमें कार्यरत लाखों कर्मचारियों के भविष्य पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। यह कदम जहां एक तरफ देश विरोधी है वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी विरोधी भी है। यह सब केवल और केवल पूंजीपतियों की मुनाफाखोरी को बढ़ाने के दृष्टिकोण से उठाया जा रहा है।
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केंद्र सरकार की मनमानी के खिलाफ जब देश की 5 डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन ने हड़ताल का आह्वान किया तो आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने बेहद खतरनाक आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम के जरिये हड़ताल व लोकतांत्रिक प्रणाली से होने वाले सभी तरह के प्रदर्शनों को प्रतिबंधित करने का फरमान जारी कर दिया। इससे न केवल रक्षा उत्पादन क्षेत्र ही प्रभावित होगा अपितु इसके कर्मचारियों के लिए भी गंभीर परिणाम होंगे। सीटू जिला कमेटी ने मांग की है कि कर्मचारी व ट्रेड यूनियन विरोधी आवश्यक रक्षा सेवा अधिनियम को तत्काल निरस्त किया जाए। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों व विशेषतौर पर डिफेंस कारखानों के रक्षा उत्पादन के धड़ाधड़ निजीकरण पर तुरंत रोक लगाई जाए। सीटू देश की सुरक्षा व कर्मचारियों के हितों के लिए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ेगी।
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